सुनवाई की तारीख से 11 दिन पहले ही सुना दिया फैसला

लखनऊ 
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर इलाके के एक मकान की कब्जेदारी के विवाद का फैसला तय तारीख से 11 दिन पहले ही सुनाने का मामला सामने आया है। एक पक्ष का आरोप है कि उन्हें सुने बिना ही तय तारीख से पहले ही एसडीएम ने दूसरे पक्ष के हक में फैसला सुना दिया है। शुक्रवार को कोर्ट जाने पर उन्हें मामले की जानकारी हुई, इसको लेकर काफी हंगामा भी हुआ। 
 
एसजीपीजीआई की रिटायर्ड नर्स जेके नायर की 14 अप्रैल 2017 को मौत हो गई थी। हैवतमऊ मवैया में उनका मकान है। इसी मकान की कब्जेदारी को लेकर उनकी बहन अंबिका तिवारी और ड्राइवर संजय शुक्ला के बीच विवाद चल रहा है। संजय शुक्ल खुद को जेके नायर का दत्तक पुत्र और अंबिका तिवारी उर्फ अंबिका नायर बहन बताकर दावा कर रही हैं। इस मामले की सुनवाई एसडीएम सरोजनीनगर की कोर्ट में चल रही थी। 

 
अंबिका का आरोप है कि मामले की सुनवाई के लिए एसडीएम कोर्ट में 28 सितंबर की तारीख तय की गई थी लेकिन एसडीएम सरोजनीनगर चंदन पटेल ने 7 सितंबर को ही संजय शुक्ल के पक्ष में फैसला सुनाकर मकान खाली करवाने और उसे कब्जा दिलवाने का निर्देश जारी कर दिया है। शुक्रवार को वह तय तारीख पर गईं तो मामले की जानकारी हुई। 

वहीं एसडीएम का कहना है, 'संजय ने जो दस्तावेज प्रस्तुत किए उससे यही सामने आया कि जेके नायर ने उन्हें गोद लिया था। उन्होंने संजय के पक्ष में मकान की वसीयत की थी। सीआरपीसी की धारा-145 के तहत वाद दायर किया गया था। दोनों पक्षों को कई बार सुना जा चुका है। लिहाजा रिजर्व डेट में फैसला सुनाया गया है, जो नियमानुसार सही है। मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।' एडीएम प्रशासन श्रीप्रकाश गुप्ता का कहना है कि मामले की जांच करवाई जाएगी। 
 

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