बीजेपी की सत्ता में वापसी, उत्तर प्रदेश में एक ही साथ टूट गए कई मिथक

 
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। अब तक जो रुझान/नतीजे सामने आए हैं उससे यह तय हो गया है कि योगी आदित्यनाथ सरकार की वापसी हो रही है। यह नतीजे कई मायने खास है और इसकी चर्चा लंबे समय तक होगी। यूपी चुनाव के जो नतीजे आ रहे हैं उसमें कई रिकॉर्ड और मिथक टूटे हैं। इसकी शुरुआत तो योगी आदित्यनाथ ने नोएडा जाकर बहुत पहले ही कर दी थी। 1985 से एक मिथक यह भी था कि जो दल सता में है अगले चुनाव में दोबारा उसकी वापसी नहीं होती है। यह मिथक भी टूट गया। 2007 के बाद योगी आदित्यनाथ पहले नेता हैं जिन्होंने बतौर सीएम उम्मीदवार विधानसभा चुनाव लड़े।

नोएडा भी गए और आगरा के इस सर्किट हाउस में भी रुके
योगी आदित्यनाथ से नोएडा जाने को लेकर सवाल भी किया गया लेकिन उनका जवाब सुनकर यही लगा कि वो इसकी परवाह नहीं करते हैं। कई बार जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब होता था कि इन बातों पर यकीन नहीं करते। वह नोएडा एक बार नहीं कई बार गए बार- बार गए। नोएडा जाने के साथ ही साथ उन्होंने आगरा के सर्किट हाउस में रुकने को मनहूस नहीं माना। नोएडा वो पहली बार 23 सितंबर, 2017 को बॉटनिकल गार्डन-कालकाजी मैजेंटा मेट्रो लाइन के उद्घाटन के लिए पीएम मोदी की यात्रा से पहले शहर का दौरा किया। इसके बाद भी वो कई बार गए। ऐसी ही दूसरी कहानी आगरा के सर्किट हाउस से जुड़ी है।

2018 में योगी इस सरकारी आवास में रुके थे। उनसे पहले करीब 16 साल तक इस सर्किट हाउस में कोई सीएम नहीं ठहरा। इस सर्किट हाउस को मनहूस मानने की शुरुआत तब हुई जब जब राजनाथ सिंह आगरा सर्किट हाउस में रुके और उसके बाद उनकी कुर्सी चली गई। आगरा सर्किट हाउस को लेकर मुख्‍यमंत्रियों में इतनी दहशत पैदा हो गई कि राजनाथ सिंह के बाद मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव इसमें ठहरने की हिम्‍मत नहीं जुटा पाए।

सत्ता में वापसी भी और एक्सप्रेस वे का डर भी हुआ दूर
1985 से यूपी की सियासत में एक मिथक था कि जो दल एक बार सत्ता में आता है, वह दोबारा अपनी सरकार की ताजपोशी नहीं करा पाता है। 10 मार्च को आए नतीजों के बाद भाजपा और सीएम योगी दोनों इस धारणा को बदल दिया है। देश के सबसे बड़े सियासी सूबे यूपी में 1985 के बाद से कोई भी दूसरी बार सीएम नहीं बना है। यह मिथक भी आज टूट गया। ऐसा ही कुछ एक्सप्रेस वे के शुरुआत को लेकर भी कहा जात था कि जिसने इसकी शुरुआत की वो लौट के नहीं आया। 2002 में मायावती ने ताज एक्सप्रेस वे की शुरुआत की और शिलान्यास के बाद सरकार चली गई। इसके बाद आगरा एक्सप्रेस वे की शुरुआत अखिलेश यादव ने की और उसके बाद वो सत्ता में नहीं लौटे। चुनाव से ठीक पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का उद्धाटन किया बावजूद इसके उनकी दोबारा वापसी हो रही है।

हस्तिनापुर और कासगंज की कहानी बरकरार
यूपी की हस्तिनापुर विधानसभा सीट को लेकर उत्तर प्रदेश की हस्तिनापुर को लेकर भी इतिहास काफी रोचक है। मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट के बारे में कहा जाता है कि जिस पार्टी का नेता इस सीट पर जीतता है प्रदेश में उसी की सरकार बनती है। यह रिकॉर्ड इस बार भी बरकरार दिखाई पड़ रहा है। इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। इसी तरह कासगंज सदर विधानसभा सीट के बारे में कहा जाता है कि पिछले 17 चुनावों में 14 चुनाव ऐसे हैं जिसमें जिस दल का प्रत्याशी जीता उसी दल की सरकार बनी। अब तक इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार अपने नजदीकी उम्मीदवार से आगे हैं।

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