3 नक्सली विस्फोटक सप्लायर कोड़ेनार गिट्टी खदान में विस्फोट करने वाले निकले

जगदलपुर
बस्तर जिले की पुलिस ने दो दिन पूर्व नक्सलियों को विस्फोटक सप्लाई करते जिन 09 आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने विस्फोटक सामग्री बूस्टर 83 एमएम 09 नग, कॉरडेक्स वायर 02 बंडल, डेटोनेटर 13 नग, सेफ्टी फ्यूज (हरा) 2.5 मीटर, सेफ्टी फ्यूज (लाल) 01 मीटर, एक्सल वायर 31 नग डेटोनेटर लगा हुआ बरामद कर गिरफ्तार किया है, उनमें से तीन नक्सली विस्फोटक सप्लायर कोड़ेनार की गिट्टी खदान में विस्फोट करने का काम करते थे। हालांकि ये तीन लोग कौन हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी पुलिस से उपलब्ध नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस इतना जरूर कह रही है कि गिरफ्तार 9 लोगों में से तीन लोग कोड़ेनार गिट्टी खदान में काम करते थे और वहां प्रत्यक्ष रूप से खदान के विस्फोट के काम से जुडे हुए थे। ऐसे में पुलिस को आशंक है कि जो विस्फोटक नक्सलियों तक पहुंचाया जा रहा था, वह इसी खदान से चुराया गया हो।

उल्लेखनीय है कि बस्तर जिले में एक दर्जन से ज्यादा चूना और पत्थर की खदानें चल रही हैं। यहां विस्फोट के लिए बूस्टर का उपयोग किया जाता है। अभी खदानों में विस्फोट के लिए जो बूस्टर लाया जा रहा है वह लाइसेंस के जरिए आता है, लेकिन खदान में विस्फोट के समय कितना बूस्टर उपयोग हुआ और कितना बचा इसकी विशेष जानकारी खदान मालिक को नही है, और प्रशासन को भी नही है। बस्तर के नक्सलग्रस्त इलाकों में नक्सलियों को बारूद की आपूर्ति गिट्टी खदान में विस्फोट के नाम पर लाये जाने वाले बारूद से किये जाने का मामला कोई नया नही है, इसका खुलासा दशकों पहले हो चुका है, जिस पर सुरक्षा बलों एवं खुपिया विभाग नक्सल क्षेत्रों में नक्सलियों द्वारा किये गये विस्फोंट से जवानों के मौत के बाद नाराजगी के तौर पर उठ चुकी थी। जिसके बाद विस्फोटक सामग्री में बार कोड लगाने की व्यवस्था की गई जिससे यह पता चलेगा कि नक्सलियों तक पंहुचने वाला विस्फोटक सामग्री कहां से बनकर निकला है, और किसे इसकी आपूर्ति की गई, विस्फोटक सामग्री में बार कोड अनिवार्य किये जाने से इसका इतना असर अवश्य हुआ कि नक्सलियों तक विस्फोटक सामग्री पंहुचने में भारी कमी आई बावजूद इसके इसमें पूरी तरह से रोक लगाने में बार कोड नाकाम है, अब कम मात्रा में गिट्टी खदानों से विस्फोटक नक्सलियों तक पंहुचने का क्रम आज भी जारी है, गिट्टी खदानों से विस्फोटक नक्सलियों तक नही पंहुचने के लिए गिट्टी खदानों को विस्फोटक आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर स्थानिय प्रशासन के द्वारा आवश्यकता अनुसार विस्फोटक के साथ गिट्टी खदानों में विस्फोट के लिए बकायदा शासकीय कर्मचारी जो इसका विशेषज्ञ हो के द्वारा गिट्टी खदानों में विस्फोट करने के कार्य को अंजाम दे करना होगा, अन्यथा नक्सग्रस्त इलाकों में बारूदी धमा•े को रोक पाना संभव ही नही है।

एसडीओपी एश्वर्य चंद्राकर ने बताया कि बरामद विस्फोट में से कई सामानों में कंपनी का नाम और सीरियल नंबर लिखा हुआ है। ऐसे में एक-दो दिनों में सीरियल नंबर के आधार पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि विस्फोटक सामग्री कोड़ेनार से चुराई गई थी या फिर आंध्र-तेलंगाना के किसी खदान से लाया गया था।

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