कृषि छात्रों द्वारा किसानों को बताया उठी हुई क्यारी बनाने का तरीका

बेमेतरा
कुमारी देवी चौबे शासकीय कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र साजा मे अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं द्वारा ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (रावे) कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायत मौहाभाठा के किसानों को उठी हुई क्यार' बनाने का तरीका बताया गया। क्यारी बनाने का प्रदर्शन गांव के किसान गौकरण साहू की बाड़ी में किया गया। इस दौरान पवन साहू, टोकेश्वर साहू, संतोष साहू सहित अन्य किसान भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय एवं डॉ. हेमेत कुमार जांगड़े के दिशा निर्देश में संपन्न हुआ।

छात्र छात्राओं ने बताया कि उठी हुई क्यारी खरीफ की फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं क्योंकि बारिश के मौसम में जलभराव एक मुख्य समस्या है। जलभराव के कारण आर्दग्रलन रोग का प्रकोप अधिक होता है, साथ ही बीजो के अंकुरण में भी समस्या आती है। यह पौधशाला मुख्यत: साग-सब्जियों के लिए तैयार की जाती है। जिनके बीजों की कीमत अधिक होने के साथ-साथ वातावरण के प्रति संवेदनशील होते है। अत: खरीफ फसलों के लिए उनका रखरखाव अधिक आवश्यक हो जाता है। यह क्यारी जमीन से 10-15 सेमी. ऊपर बनायी जाती है। उठी हुई क्यारी बारिश के दिनों में अत्यंत लाभदायक होती है। ऊँचाई पर होने के कारण जलभराव की समस्या को दूर करके पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है। नर्सरी तैयार करने के लिए सर्वप्रथम, समतल स्थान चयन का किया जाता है। प्रदर्शन के दौरान बनायी नर्सरी की चौडाई  एक मी.  तथा लंबाई 3 मी. एवं ऊंचाई 15 से.मी. रखी गई। जमीन की अच्छी तरह से जुताई करने के पश्चात् मिट्टी से कंकड़-पत्थर, पौधो की जड़े इत्यादि को निकाल दिया जात है। इसके पश्चात् 5-10 किग्रा. गोबर की अच्छी सड़ी हुई खाद को प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मिला दिया जाता है। नर्सरी कत्र तैयार होने के बाद, मिर्ची तथा बैगन के बीजों की बुआई की गई। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं देवेन्द्र साहू, नेमशरन सिंह, उमेश पटेल, नरेश कुमार श्याम, प्रवीन कुमार वर्मा, अनिल साहू, मीरा उरेती, उर्मिला, काजल के द्वारा किया गया।

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