कुपोषण मुक्त पंचायतों की संख्या और बढ़ाने पर करें फोकस-भीम सिंह

रायगढ़
बच्चों में कुपोषण की दर में कमी लाने के लिए लगातार कार्य करें, जिले में जितने भी बच्चे कुपोषित है, उनके घर-घर जाए उनके पालकों से मिलकर उनकी काउंसिलिंग करें और बच्चों को सुपोषित बनाने आंगनवाड़ीवॉर कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल करें। ताकि रायगढ़ जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लक्ष्य को हम जल्द प्राप्त कर सकें। उक्त बातें कलेक्टर भीम सिंह ने आज महिला बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि जिले के 19 पंचायत शत-प्रतिशत कुपोषण मुक्त हो चुके, 426 पंचायतों में कुपोषण की दर 10 प्रतिशत से नीचे जा चुकी है। यह सराहनीय बात है। इन पंचायतों के लिए विशेष योजना के साथ कार्य करने पर जल्द ही ये भी शत-प्रतिशत कुपोषण मुक्त होंगे।

कलेक्टर सिंह ने माह सितम्बर से फरवरी 2022 तक में कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी लाने वाले टॉप 10 सेक्टरों की जानकारी ली। जिनमें से तमनार के सराईडीपा एवं पुसौर के डुमरमुड़ा सेक्टर का अच्छा प्रदर्शन रहा। इस दौरान कलेक्टर सिंह उक्त सेक्टर के सुपरवाईजर से उनके कार्यशैली के बारे में पूछा तो उन्होंने अपना अनुभव साझा किया। साथ ही इस दौरान अपेक्षानुरुप काम नही करने वाले खरसिया के बर्रा सेक्टर सुपरवाईजर को नोटिस जारी करने कहा। कलेक्टर सिंह ने महिला बाल विकास अधिकारी को कहा कि जिन-जिन सेक्टरों में कुपोषण के मामले अभी भी अधिक हैं वहां विशेष मॉनिटरिंग करें। यहां यदि कोई समस्या है तो तत्काल उसका निराकरण किया जावे। उन्होंने कहा कि 3-6 वर्ष के सभी बच्चों को आंगनबाड़ी में चावल खिलाया जाना है। जहां भी चावल की कमी है उसकी सूचना तत्काल मुझे दें। घरघोड़ा में जो बच्चे लाभान्वित नहीं हो पाए है और जो आंगनबाड़ी तक पहुंच नहीं पा रहे है, उन्हें वहां तक लाने की व्यवस्था करें। बैठक के दौरान उन्होंने कुपोषण मुक्ति के लिए चल रहे कार्यों की समीक्षा की और सभी सीडीपीओ से उनके काम के बारे में जानकारी ली। कुछ सीडीपीओ द्वारा संतोषजनक जानकारी नहीं दिए जाने पर कलेक्टर सिंह ने गहरी नाराजगी जतायी और उन्हें अपने काम में कसावट लाने के निर्देश दिए। जिन सीडीपीओ का प्रदर्शन कमजोर है, उन्हें नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। कलेक्टर सिंह ने बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा नए कौशल्या मातृत्व योजना एप के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुपोषण मुक्ति की दिशा में सतत् रूप से कार्य करने हेतु जिले में डीएमएफ फंड से आंगनबाड़ी सेक्टरों में मुगीर्पालन का काम बढ़ाने बैक यार्ड पोल्ट्री बांटे गये है। जिससे स्थानीय स्तर पर ही अंडों का उत्पादन बढ़े और आंगनबाड़ी में इसकी आपूर्ति की जा सके।

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