कृषकों का नवीन पंजीयन 31 अक्टूबर तक होगा, 921 कृषकों के आवेदन मिले

दंतेवाड़ा

जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में पंजीकृत कृषकों से धान एवं मक्का के पैदावार की समर्थन मूल्य में खरीदी शासन के निदेर्शानुसार 1 नवम्बर 2022 से प्रारंभ होगी। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी लेम्प्स के 12 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से की जाती है। इस हेतु सभी उपार्जन केंद्रों की साफ-सफाई कर चेक लिस्ट अनुसार सारी व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त की जा रही हैं। वर्तमान खरीफ वर्ष 2022-23 में समर्थन मूल्य में धान खरीदी हेतु पूर्व वर्ष के पंजीकृत 11126 कृषकों के पंजीयन को कैरी फारवर्ड किया गया है। साथ ही साथ नवीन कृषकों का पंजीयन भी 31 अक्टूबर तक किया जाएगा। अब तक लगभग 921 नवीन कृषकों के आवेदन पंजीयन हेतु प्राप्त हुए हैं। नवीन कृषक अपने ग्राम के ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी से सम्पर्क कर पंजीयन करा सकते हैं।

विगत खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में जिले में 11126 कृषक पंजीकृत थे, जिसमें से 4600 कृषकों से 17437 मेट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। वर्तमान खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में शासन द्वारा धान ग्रेड ए हेतु 2060 रू. प्रति क्विंटल धान सामान्य हेतु 2040 रू. प्रति क्विंटल एवं मक्का 1962 रू. प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जाएगी। इस•े अलावा इस वर्ष शासन •े द्वारा उड़द-6600 रू. प्रति क्विंटल, मूंग- 7755 रू. प्रति क्विंटल, अरहर- 6600 रु. प्रति क्विंटल एवं रागी 3578 रू. प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर खरीदी की जावेगी।

केवल पंजीकृत कृषक ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (6000 रू. वार्षिक) तथा छत्तीसगढ़ शासन की राजीव गांधी किसान न्याय योजना – 2022 (9000 रू.वार्षिक) हेतु पात्र होंगे इसलिए अधिक से अधिक किसान अपना पंजीयन कराएं। जिले में वर्तमान खरीफ वर्ष में धान खरीदी हेतु अनुमानित लक्ष्य 21000 मेट्रिक टन है। जिसके लिए जिला प्रशासन द्वारा बारदाने की व्यवस्था कराई जा रही है। जिले में कृषकों से धान खरीदी हेतु पर्याप्त बारदाना उपलब्ध रहेगा। जिले में आगामी धान खरीदी कार्य के सफल संचालन हेतु सभी उपार्जन केंद्रों में नोडल अधिकारी एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। साथ ही साथ धान के अवैध परिवहन को रोकने हेतु चेक पोस्ट में 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है। इस वर्ष धान खरीदी केंद्रों में धान विक्रय हेतु आने वाले कृषकों की सुविधा हेतु छाया, पानी, शौचालय तथा टोकन की व्यवस्था की गई है और कृषकों से लगातार फीडबैक हेतु पंजी एवं स्थानीय निगरानी समिति की भी तैनाती की गई है।

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