रेल सुविधा को मोदी सरकार ने मजाक बना दिया : कांग्रेस

रायपुर

मोदी सरकार के द्वारा कोयला आपूर्ति का बहाना बना कर छत्तीसगढ़ की 46 और ट्रेनों को बंद के किये जाने को दुर्भाग्य जनक बताते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार के मनमानी और लापरवाही का खामियाजा छत्तीसगढ़ के ढाई करोड़ जनता को उठाना पड़ा है। मोदी सरकार इतनी क्रूर और अमानवीय और गैर जिम्मेदार हो चुकी है कि अब एक्सप्रेस ट्रेनों को गंतव्य स्थान पहुंचने के पहले बीच रास्ते में रद्द कर घोषणा किया जा रहा है कि ट्रेन आगे नहीं जायेगी। मोदी सरकार ने देश की सबसे विश्वसनीय नागरिक परिवहन सुविधा मानी जानी वाली रेल सुविधा को मजाक बनाकर रख दिया है।

उन्होंने कहा कि साऊथ बिहार एक्सप्रेस जो दुर्ग से पटना जा रही थी उसे बीच रास्ते रायगढ़ में रद्द कर दिया गया। पहले से आने जाने की तैयारी का ट्रेन की टिकट आरक्षित कराए जनता के साथ धोखा मोदी सरकार कर रही है। बीते 4 माह से अधिक हो चुका है जब छत्तीसगढ़ के ट्रेनों को अचानक स्थगित कर दिया जा रहा है अभी पुन: 45 ट्रेनों को स्थगित किया गया है इसके पहले ट्रेनों भी स्थगित किया गया था। पूर्ववर्ती सरकारें रेल्वे को नागरिकों की सुविधा के लिये चलाती थी मोदी सरकार कमाने के लिये जनता को लूटने के लिये इस्तेमाल कर रही। देश भर में कोरोना के सारे प्रतिबंध हटा दिये गये लेकिन रेल्वे कोरोना के नाम पर जनता को मिलेन वाली सारी सुविधाये बंद कर दिया। वृद्ध, विकलांग, छात्रों की सुविधाये हटा दिया। रेल्वे स्टेशन पर टिकिट बिक्री बंद कर टिकिटों के दाम बढ़ा दिया गया।

शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार जानबूझ कर छत्तीसगढ़ के लोगों को परेशान करने की नीयत से छत्तीसगढ़ का यात्री ट्रेनों को रद्द कर रही है। देश में एक जोन मंडल से सर्वाधिक ट्रेने कही रद्द की गयी है तो वह छत्तीसगढ़ है केन्द्र सरकार हमारे राज्य का कोयला ढोने के लिये हमारे ही नागरिकों को परेशान कर रही है दुर्भाग्यजनक है कि भाजपा के छत्तीसगढ़ के नेता बेशमीर्पूर्वक केन्द्र का मौन समर्थन कर रहे है। भाजपा सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मोदी सरकार के मनमानी पर भाजपा के सांसद मौन रहकर आम जनता के पीड़ा को बढ़ाने में लगे हुए है। भाजपा के 9 सांसदों के निष्क्रियता का नुकसान छत्तीसगढ़ की जनता को उठाना पड़ रहा है छत्तीसगढ़ की जनता के परेशानियों में कभी भी भाजपा के सांसद जनता के पक्ष में खड़े नहीं हुए।

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