मुद्दों पर बनी थी सहमति, निराकरण को लेकर निर्माण विभागों के सचिवों के रवैये से कांट्रेक्टर एसोसिएशन नाराज

रायपुर
जल जीवन मिशन योजना के तहत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों के करोड़ों के बिलों का भुगतान कई महीने से रुका हुआ है। छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन द्वारा किए गए टेंडर बहिष्कार आंदोलन की वजह से भुगतान का रास्ता साफ हुआ है। लेकिन ठेकेदारों में इस बात का रोष है कि जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उनके निराकरण को लेकर निर्माण विभागों के सचिवों का रवैया ठीक नहीं है। उक्त आरोप लगाते हुए एसोसिएशन ने कहा है कि मंत्रालय में बैठे अधिकारी फाइल पर चर्चा करने के बजाय उसे रोककर रखे हुए हैं।

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने कहा कि टेंडर बहिष्कार आंदोलन को खत्म हुए 10 दिन हो गए हैं। कई बार पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग के सचिवों से बातचीत के लिए समय मांगा गया, लेकिन उनका रवैया उदासीन बना हुआ है। इससे आक्रोशित पदाधिकारियों और सदस्यों ने 20 जुलाई को फिर राज्य स्तरीय बैठक बुलाई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बीच यह तय हुआ था कि जायज मांगों के निराकरण की प्रक्रिया तेजी से होगी, परंतु सिंचाई विभाग के सचिव से बात नहीं होने के कारण ठेकेदारों ने टेंडर का बहिष्कार जारी रखा है, क्योंकि सबसे अधिक विसंगतियां सिंचाई विभाग में ही हैं। पीडब्ल्यूडी की गाइड लाइन के विपरीत नियम निर्माण कार्यों के टेंडरों में लगाए जाते हैं। जैसे नहर-नाली निर्माण में मेंटेनेंस 10 साल है, जो संभव ही नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय में बैठे अधिकारियों के पास प्रस्ताव पहुंच चुका है, लेकिन निराकरण की फाइल को आगे बढ़ाने के बजाय दबाने की कोशिश की जा रही है।

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