आनासागर झील संरक्षण योजना के तहत अवाप्त भूमि का कब्जा नहीं मिलने के कारण मुआवजा भी नहीं दिया: मंत्री धारीवाल

जयपुर। नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री श्री शांति कुमार धारीवाल ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि छबड़ा में वन भूमि पर अवैध निर्माण के संबंध में कोर्ट में स्टे नहीं है तथा उस अतिक्रमण को हटाने के लिए आगे की कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।

श्री धारीवाल ने प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा अजमेर के जिला कलक्टर को पारित निर्देश में झीलों को संरक्षित करने, बरसात के पानी की आवक को सुनिश्चित करने एवं वैटलैण्ड निर्माण के लिए भूमि अवाप्ति के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि आनासागर झील संरक्षण योजना को दो अवॉर्ड 75 करोड़ 43 लाख तथा 33 करोड़ 5 लाख के जारी भी किए गए।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2012 में इस प्रकरण में कब्जा नहीं करने का निर्णय पारित हुआ इस कारण संबंधित को मुआवजा भी नहीं मिला।

इससे पहले श्री धारीवाल ने विधायक श्रीमती अनिता भदेल के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि आनासागर झील के चारों ओर झील संरक्षण हेतु 171 बीघा 3 बिस्वा 10 बिस्वांसी भूमि का अवाप्ति अवार्ड 10 अक्टूबर 2014 को जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि इन खसरा नम्बरों का राजस्व मानचित्र में सुपर इम्पोज नहीं किया गया है। उन्होंने अवाप्तशुदा खसरा नम्बरों की सूची सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि वैटलैण्ड हेतु कुल 215 बीघा 14 बिस्वा भूमि अवाप्त की गई है।

आनासागर वैटलैण्ड योजना हेतु अवाप्त भूमि के खसरा नम्बरों का राजस्व मानचित्र में सुपर इम्पोज नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि आनासागर झील संरक्षण योजना एवं वैटलैण्ड निर्माण योजना हेतु अवाप्त भूमि के किसी भी खातेदार को मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया गया है।

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