बिहार की राजनीति में इस वक्त सुर्खियों में कांग्रेस , आखिर राहुल गांधी के मन में क्या चल रहा ?

 

पटना। बिहार की राजनीति का सबसे मौजूं और यक्ष प्रश्न यही है कि बिहार प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष कौन होगा? दरअसल बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा का कार्यकाल पिछले साल सितंबर में ही पूरा हो चुका था। ऐसे में आखिर में उन्होंने खुद दिल्ली जाकर राहुल गांधी और CWC को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद से ही बिहार के राजनीतिक गलियारे में ये चर्चा तेज हो गई है कि अब बिहार कांग्रेस का नया सेनापति कौन होगा। हालांकि NBT को सूत्रों ने पुष्ट जानकारी दी है कि फिलहाल कांग्रेस आलाकमान किसी नाम को लेकर निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा है। लेकिन ये भी माना जा रहा है कि नए अध्यक्ष का नाम चौंकाने वाला हो सकता है।

क्या कन्हैया कुमार को मिलेगी बिहार कांग्रेस की कमान?
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए वैसे तो पिछले 2 दिन से कई नामों की चर्चा हो रही है। लेकिन शुक्रवार से इसमें एक नया नाम जुड़ गया है। वो नाम है लेफ्ट छोड़ राइट की राजनीति में आए कन्हैया कुमार की। इस चर्चा के पीछे तीन कारण हैं, पहला ये कि कन्हैया के सिर पर इस वक्त खुद राहुल गांधी का हाथ है। दूसरा ये कि लेफ्ट की तरह ही कांग्रेस को भी कन्हैया में मोदी को चुनौती देने वाला एक तगड़ा चेहरा नजर आता है और तीसरी सबसे बड़ी बात ये कि कन्हैया बिहार के रहनेवाले हैं और सवर्ण जाति से होने के बावजूद दलितों के लिए आवाज बुलंद करते रहते हैं।
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कन्हैया की राह इतनी आसान भी नहीं?
बिहार कांग्रेस के एक सूत्र के मुताबिक कन्हैया के अध्यक्ष पद की राह बहुत आसान नहीं है। उनकी राह में फूल कम और कांटे ज्यादा हैं। दरअसल बिहार कांग्रेस के कई सीनियर लीडर ही इस नाम के खिलाफ हैं। सूत्रों के मुताबिक उनका कहना है कि अगर कन्हैया को बिहार कांग्रेस की कमान दी जाती है तो इससे पार्टी में उन लोगों के बीच असंतोष खुल कर सामने आ जाएगा, जो सालों से पार्टी के लिए समर्पित हैं। इनमें सिर्फ बड़े-छोटे नेता ही नहीं बल्कि कार्यकर्ता भी हैं जो ग्राउंड पर जाकर कांग्रेस के वोट बैंक को मजबूत करने का काम करते हैं।

अध्यक्ष पद की रेस में कौन-कौन से नाम?
बिहार कांग्रेस के ही एक सूत्र ने NBT बिहार की टीम को बताया कि बिहार प्रभारी भक्त चरण दास चार नामों को लेकर तैयार हैं। इनमें पहला नाम कुटुंबा विधायक विधायक राजेश राम, दूसरे नंबर पर कोढ़ा से पार्टी के टिकट पर 2020 में हार का सामना कर चुकी पूनम पासवान हैं। तीसरे नंबर पर बिहार कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष प्रवीण कुशवाहा हैं, और बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास की चौथी पसंद पूर्व सांसद रंजीत रंजन हैं।

समझिए कांग्रेस के वोट बैंक का समीकरण
बिहार कांग्रेस के हमारे विश्वसनीय सूत्र के मुताबिक प्रभारी की पसंद का खामियाजा पार्टी को 2024-2025 के चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि राज्य में दलित वोटों का विभाजन है जिसमें कांग्रेस को एक हिस्सा मिलने की ही गुंजाइश है। बिहार के 15 फीसदी दलित-महादलित वोटों में महादलित के नारे के चलते नीतीश कुमार और बीजेपी के साथ है, कुछ जीतन राम मांझी के साथ और कुछ कांग्रेस के साथ। किसी दलित नेता को नेतृत्व देने का वैसे भी कांग्रेस को ऐसे में कोई फायदा नहीं मिलेगा।

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