सीएम अरविंद केजरीवाल को एलजी ने लिखा पत्र, मनीष सिसोदिया के आरोपों का किया खंडन

नई दिल्ली
उपराज्यपाल (एलजी) विनय कुमार सक्सेना ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के इन आरोपों का खंडन किया कि वह भाजपा का पक्ष ले रहे हैं। एलजी ने केजरीवाल से आग्रह किया कि वह अपने मंत्रियों को गुमराह करने वाले बयान देने से रोकें। सिसोदिया ने कोविड-19 महामारी के दौरान सात अस्थायी अस्पतालों के निर्माण में कथित अनियमितता की जांच भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) से कराने की अनुमति देने के सिलसिले में कुछ दिन पहले एलजी को पत्र लिखा था। इसमें उन पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया था। इस पर सक्सेना ने मंगलवार को जवाब दिया है। केजरीवाल को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि यह दुखद और हैरान करने वाला है कि उपमुख्यमंत्री ने मामले पर तथ्यात्मक और कानूनी तौर पर गलत बयानी की है। वांछित प्रशासनिक कार्रवाई का गैर जरूरी तौर पर राजनीतिकरण किया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि हर शुक्रवार को होने वाली बैठक में उनकी (दोनों की) भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करने पर सहमति बनी थी और इसके लिए उनका सहयोग मांगा था। एलजी ने लिखा कि सुशासन के हित में मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप अपने मंत्रियों को ऐसे निरर्थक बयान देने से रोकें जो गुमराह करने वाले और अवरोध पैदा करने वाले हैं।एलजी के अधिकारों के बारे में भी बताया उपराज्यपाल सक्सेना ने सिसोदिया द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के साथ-साथ अपने अधिकारों की कानूनी स्थिति के बारे में भी बताया है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने चार अगस्त 2016 को अपने फैसले में कहा था कि दिल्ली के शासन की संवैधानिक योजना के अनुसार सेवाएं विषय दिल्ली विधानसभा के दायरे से बाहर है। यह फैसला अभी भी मान्य है, क्योंकि इस मुद्दे पर चुनी हुई सरकार द्वारा दायर दीवानी अपील पर उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ में सुनवाई होना बाकी है। सावधानीपूर्वक शिकायत का परीक्षण करने और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम 1988 और अदालतों द्वारा तय किए गए कानून के प्रावधानों के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत पर तफ्तीश की अनुमति दी गई है।

सिसोदिया ने ये कहा था सिसोदिया ने अपने पत्र में पूछा था कि किसके दबाव में आकर सक्सेना ने एक साल पुरानी शिकायत पर एसीबी से जांच कराने की अनुमति दी है, जबकि उनके पूर्ववर्ती अनिल बैजल इसे बेबुनियाद बताकर खारिज कर चुके थे। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने लोक निर्माण विभाग द्वारा अस्थायी अस्पतालों के निर्माण में कथित अनियमितता की शिकायत की थी, जिसकी एसीबी से जांच कराए जाने के निर्देश उपराज्यपाल सक्सेना ने दिए हैं।

पीसी एक्ट के तहत जांच की अनुमति देना चुनी हुई सरकार का अधिकार क्षेत्र
दिल्ली सरकार सात कोविड अस्पतालों की एसीबी जांच के मुद्दे पर उपराज्यपाल द्वारा सीएम केजरीवाल को पत्र लिखे जाने के बाद दिल्ली सरकार के सूत्रों ने कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक (पीसी) एक्ट के तहत जांच की अनुमति देना सेवाएं विभाग के दायरे में नहीं आता है, यह चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। यह एक्ट किसी भी सरकार को जांच की अनुमति देने के लिए अधिकतम चार महीने का समय देता है। तथ्य यह है कि पूर्व उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अस्पताल की जांच के मामले में चार महीनों में न तो कोई अनुमति दी और न ही निर्वाचित सरकार से सलाह मांगी, यह दर्शाता है कि उन्हें शिकायत में कोई योग्यता नहीं मिली। वर्तमान एलजी द्वारा अपने पूर्ववर्ती पर इतनी महत्वपूर्ण फाइल पर बैठ जाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाना दुर्भाग्यपूर्ण और पूर्णरूप से अनुचित है।

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