एआईसीटीई ने 2 साल और बढ़ाया इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए ब्रेक

भोपाल
AICTE: अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने नये इंजीनियरिंग कॉलेजों की मान्यता देने पर दो साल की रोक को आगामी दो साल के लिये और बढ़ा दिया है। सिर्फ सरकार ही नये कॉलेज खोल पाएगी, जिसकी शर्तें एआईसीटीई अपनी गाइडलाइन में जारी करेगा। एआईसीटीई ने ये निर्णय देश और प्रदेश में बिगड़ती इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लिया है।  

प्रदेश में इंजीनियरिंग कालेजों की हालात साल दर साल बिगडते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दो साल भी प्रदेश के एजुकेशन सिस्टम के लिये काफी नुकसान दायक रहा है। पांच सालों में प्रदेश के कई कालेजों में ताले लग चुके हैं। यहां तक बैंक ऋण नहीं चुकाने पर उनकी कुर्की तक करा दी गई है। विद्यार्थियों को एक से दूसरे कालेज में स्थानांतरित किया जा चुका है। एआईसीटीई ने नये कालेजों की मान्यता देने पर दो साल की रोक को और आगामी दो साल के लिये बढा दिया है। सूबे में इंजीनियरिंग के 155 कालेज संचालित हैं। प्रदेश साथ देश में इंजीनियरिंग की हालात बहुत लचर बनी हुई है। इसलिए एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए देशभर में नये इंजीनियरिंग कालेजों की मान्यता देने पर रोक लगा दी है। अब प्रदेश में कोई नया कालेज इंजीनियरिंग संचालित नहीं कर पाएगा। जबकि प्रदेश से इंजीनियरिंग कालेज की कुछ ब्रांचों में प्रवेश नहीं होने की दशा में उसे बंद करने के आवेदन तकनीकी शिक्षा विभाग पहुंचने लगे हैं।

बिना शर्त के राज्य सरकार भी नहीं खोल पाएगी कॉलेज
एआईसीटीई ने राज्य सरकारों को इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने की इजाजत देगा। बशर्ते की वह ग्रामीण क्षेत्र में कॉलेज खोलने में सिर्फ अपना बजट आवंटित करेगी। सरकार पीपीपी मोड पर कॉलेज नहीं खोल पाएगी। सिर्फ शिवपुरी में पीपीपी मोड पर इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित हो रहा है। इसके लिये एआईसीटीई जल्द ही गाइडलाइन जारी करेगा।

सरकार को मिलेगा मौका
एआईसीटीई ने दो साल से लगी नये निजी इंजीरियरिंग कालेजों को खोलने पर रोक को दो साल के लिये और बढा दिया है। कुछ शर्तों के तहत इंडस्ट्रीय और राज्य सरकारों को नये कालेज खोलने की स्वीकृति दी जा सकती है।  
अनिल सहस्त्रबुद्धे, अध्यक्ष, एआईसीटीई

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