AIIMS Bhopal : डॉ. अजय सिंह बोले – ‘आर्थराइटिस का मतलब सर्जरी नहीं है’

AIIMS Bhopal : प्रतिवर्ष 12 अक्टूबर को "विश्व आर्थराइटिस दिवस" ​​के रूप में मनाया जाता है । इस अवसर पर, एम्स भोपाल के अस्थि रोग विभाग और मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से "आर्थराइटिस संगोष्ठी" का आयोजन किया गया ।

भोपाल

AIIMS Bhopal : प्रतिवर्ष 12 अक्टूबर को “विश्व आर्थराइटिस दिवस” ​​के रूप में मनाया जाता है । इस अवसर पर, एम्स भोपाल के अस्थि रोग विभाग और मेडिसिन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से “आर्थराइटिस संगोष्ठी” का आयोजन किया गया । इस संगोष्ठी का उद्घाटन कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण के दौरान उन्होंनें कहा कि आर्थराइटिस या गठिया का मतलब सर्जरी नहीं है । जीवन शैली में सुधार, खानपान की आदतों, कार्यशैली में परिवर्तन, जोखिम कारकों की पहचान जैसे बहुविध दृष्टिकोण रोगियों को सामान्य जीवन के लिए सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि निकट भविष्य में एम्स भोपाल इन रोगियों को एक छत के नीचे व्यापक और एकीकृत देखभाल प्रदान करने के लिए “आर्थराइटिस एवं संधि विकार केंद्र” शुरू करेगा । यह केंद्र अनुसंधान और ग्रामीण आबादी के लिए आउटरीच सेवाओं में भी सहायक होगा । इस दौरान निदेशक डॉ. अजय सिंह द्वारा संधिशोथ (रूमेटिड आर्थराइटिस) के रोगियों के लिए रोगी शिक्षण सामग्री भी जारी की गई ।

एम्स, भोपाल और गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के विभिन्न वक्ताओं द्वारा वयस्कों के साथ-साथ बाल्य रोगियों में होने वाले गठिया और आमवाती रोगों पर चर्चा की गई । इस दौरान आम जनता में जागरूकता के प्रसार तथा प्रारंभिक उपचार के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं में रोग के शीघ्र निदान और प्रभावी उपचार पर बल दिया गया ।

ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. मनीष द्विवेदी ने “विश्व आर्थराइटिस दिवस” ​​की पृष्ठभूमि और इसके महत्व के बारे में बताते हुए इस संगोष्ठी की शुरुआत की । डॉ. वैभव इंगले, सह प्राध्यापक, मेडिसिन विभाग ने गठिया और आमवात रोगों से पीड़ित रोगी के प्रति दृष्टिकोण पर बात की ।

इस दौरान कार्यक्रम की अतिथि वक्ता डॉ. प्रेक्षा द्विवेदी, (डीएम रुमेटोलॉजी) सलाहकार रुमेटोलॉजिस्ट तथा सह प्राध्यापक मेडिसिन विभाग, जीएमसी भोपाल ने “पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजी” पर बात की और उन्होंने बालकों में संधि रोगों के शीघ्र निदान तथा उनके प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया । अन्यथा यह रोग शरीर में तेजी से फैलता है एवं यह लंबे समय तक चलने वाली विकलांगता का कारण बनता है ।

एम्स भोपाल के ऑर्थोपेडिक्स के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रेहान-उल-हक ने इस बीमारी के सर्जिकल प्रबंधन में ऑर्थोपेडिक्स सर्जन की भूमिका तथा बेहतर प्रगति के लिए द्रुत प्रबंधन पर बल दिया । उन्होंने अस्थि रोग विभाग एवं मेडिसिन विभाग में रुमेटोलॉजी और आर्थराइटिस रोगों के रोगियों के लिए उपलब्ध विशेषज्ञता क्लिनिक के बारे में जानकारी दी । संगोष्ठी का समापन जनरल मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ रजनीश जोशी और डॉ जॉन ए संतोषी, अपर प्राध्यपक, हड्डी रोग विभाग के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ ।

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