पिछले साल की तुलना में इस वर्ष धान की बोवनी छह लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम हुई

भोपाल
 प्रदेश में पहले वर्षा में विलंब और फिर लगातार पानी गिरने के कारण इस वर्ष धान की बोवनी प्रभावित हुई है। जबलपुर, कटनी, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, ग्वालियर, शिवपुरी सहित अन्य जिलों में बोवनी 50 प्रतिशत से भी कम है। नरसिंहपुर में तो कम वर्षा के कारण किसानों ने नलकूप से खेतों में पानी भरकर बोवनी की। अभी तक 13.77 लाख हेक्टेयर में ही बोवनी हुई है। यह पिछले साल इस अवधि में हुई बोवनी से छह लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि, मक्का, बाजारा और ज्वार की बोवनी जरूर लक्ष्य के अनुरूप हो चुकी है। सोयाबीन 49.79 और उड़द की बोवनी 12.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

प्रदेश में वर्ष 2022 में 147 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसल की बोवनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान के लिए 34 लाख 71 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 22 जुलाई तक 19.83 लाख हेक्टेयर में बोवनी हो गई थी लेकिन इस बार यह 13.77 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई। धान के प्रमुख क्षेत्र कटनी व बालाघाट में 14 और नरसिंहपुर में 27 प्रतिशत बोवनी हुई। सिंगरौली, सतना और दतिया में 11, बुरहानपुर में 18 प्रतिशत ही लक्ष्य की पूर्ति हुई है। जबकि, सीहोर, विदिशा, हरदा, अशोकनगर, गुना और झाबुआ में धान की सौ प्रतिशत बोवनी हो चुकी है।

पूर्व कृषि संचालक जीएस कौशल का कहना है कि वर्षा का दौर थमते ही बोवनी की गति बढ़ जाएगी। अगस्त के दूसरे पखवाड़े तक बोवनी होती है, इसलिए अभी चिंता की बात नहीं है। मक्का, उड़द, सोयाबीन सहित अन्य फसलों की बोवनी ठीक हो गई है।

एक लाख हेक्टेयर में कम हुई सोयाबीन की बोवनी

उधर, सोयाबीन की बोवनी भी पिछले साल से एक लाख हेक्टेयर में कम हुई है। वर्ष 2021 में 22 जुलाई तक 49.76 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी, जो इस वर्ष 48.76 लाख हेक्टेयर है। सरकार ने 54.42 लाख हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा है। मक्का 15 लाख हेक्टेयर में बोया जा चुका है तो बाजरा दो लाख 36 हजार हेक्टेयर में लगाया गया है। तुअर के लिए चार लाख 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है, लेकिन अभी तक तीन लाख 15 हजार हेक्टेयर में ही बोवनी हुई है। अपर मुख्य सचिव कृषि अजीत केसरी ने बताया कि इस वर्ष अभी तक 111.51 लाख हेक्टेयर में बोवनी हो चुकी है।

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