MP News : 100 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को नहीं मिल रही निर्माण एजेंसी

MP News : राजधानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए निर्माण एजेंसी ही नहीं मिल पा रही है। इसके चलते विभाग को चौथी बार निविदा जारी करनी पड़ी है।

MP News : उज्जवल प्रदेश, भोपाल. राजधानी में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए निर्माण एजेंसी ही नहीं मिल पा रही है। इसके चलते विभाग को चौथी बार निविदा जारी करनी पड़ी है। इसमें खास बात यह है कि बिना निर्माण कार्य के ही इसकी लागत भी बढ़ गई है। पूर्व में नाथू बरखेड़ा में करीब 100 एकड़ जमीन पर बनने वाले स्टेडियम के लिए 103 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था।

अब यह बजट बढ़कर 108 करोड़ पहुंच गया है। इस मामले में अफसरों का कहना है कि डिजाइन बदलने के कारण लागत बढ़ रही है। वहीं, निर्माण के लिए एमपीआरडीसी विभाग पूर्व में तीन बार टेंडर निकाल चुका है, लेकिन सभी फेल हो गए। इसके चलते विभाग ने चौथी बार निविदा जारी करनी पड़ी है।

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए पूर्व में खेल विभाग को 50 एकड़ जमीन सौंपी गई थी। बाद में खेल विभाग के द्वारा 50 एकड़ अतिरिक्त जमीन की मांग पर जिला प्रशासन से की गई थी। इसके बाद पास में ही ट्रिपल आईटी को आवंटित 50 एकड़ जमीन वापस लेकर विभाग को सौंप दी गई है। इसके बाद 100 एकड़ जमीन पर निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। विभाग ने टेंडर भी जारी किये, लेकिन एजेंसी ही आगे नहीं आई।

ऐसे चलेगी निर्माण प्रक्रिया

प्रथम चरण में ग्राम नाथू बरखेड़ा भोपाल में निर्मित होने वाले अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण एवं उपकरण पर लगभग 108 करोड़ रुपए खर्च किए जायेंगे। यह कार्य तीन चरणों में 18 माह में पूरे होंगे।

स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में लगभग 10 हजार क्षमता वाला फुटबाल स्टेडियम, 4 हजार क्षमता के दो हॉकी स्टेडियम, पार्किंग, इंटरनल एवं सर्विस मार्ग, लैंडस्केपिंग, हॉर्टिकल्चर, सोलर पैनल, बाउंड्री वाल, गेट, गॉर्डरूम, सीवेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट आदि से लैस होगी। द्वितीय चरण में ग्राम नाथू बरखेड़ा भोपाल में इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तथा तृतीय चरण में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण किया जाएगा।

जमीनों के आसपास हो रहे कब्जे

स्टेडियम बनने की घोषणा के बाद से ही जमीन के आसपास अवैध कब्जे शुरू हो गये थे। जो बढ़ते ही जा रहे हैं। बीच में कार्रवाई कर प्रशासन ने कुछ अतिक्रमण जमींदोज भी किये थे, लेकिन इसके बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई थी। जिसके चलते दो दर्जन से अधिक लोगों ने बेजा कब्जे कर लिए हैं।

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