बिलाबोंग स्कूल मामला: बड़े एक्शन में जिला प्रशासन की तैयारी

भोपाल
राजधानी के बड़े स्कूलों में शुमार नीलबड़ स्थित बिलाबोंग स्कूल की कुंडली जिला प्रशासन तैयार कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार स्कूल निर्माण और स्थापना के समय पंचायत काल से दी गई अनुमतियों के दस्तावेजों का खंगाला जा रहा है। प्रशासन का अनुमान ने है कि स्कूल प्रबंधन ने नियमों का उल्लंघन किया है। ऐसे में ग्राम पंचायत नीलबड़ द्वारा की गई अनुमतियों सहित अन्य जरूरी दस्तावेज की पड़ताल जारी है। वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सख्त निर्देश के बाद अब इस मामले में जिला प्रशासन ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही स्कूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हो सकती है। गौरतलब है कि सीएम के निर्देश के बाद कलेक्टर अविनाश लवानिया ने एसडीएम, डीएसपी, शिक्षा विभाग और नगर निगम अधिकारियों का एक संयुक्त दल बनाकर राजधानी के सभी स्कूलों की जांच के आदेश दिए हैं।

बस में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज नहीं मिले, डीवीआर की जगह मिला खाली डब्बा
मामले में पुलिस ने भले ही पुलिस ने स्कूल प्रबंधन के चार लोगों पर केस दर्ज कर लिया है, लेकिन यह केस मामूली धाराओं में आता है। जबकि पुलिस से अपराध छिपाना और डीवीआर से डाटा नष्ट करने पर साक्ष्य छिपाने का अपराध बनता है। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की फटकार और सख्त कार्रवाई के निर्देश देने के बाद भी पुलिस ने स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज करने के नाम पर खानापूर्ति कर पल्ला झाड़ लिया है। एसआईटी ने पूरे मामले में जांच के बाद स्कूल के चेयरमैन, संचालक और प्राचार्य समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इतना ही नहीं स्कूल चेयरमैन, ट्रांसपोर्ट संचालक और प्राचार्य आशीष अग्रवाल से पूछताछ की गई।

नाले पर कब्जे की सूचना, नियमों का उल्लंघन
बताया जा रहा है कि बिलाबोंग स्कूल के शुभारंभ अवसर यानी वर्ष 2004-05 में देश के टॉप बिजनेसमैन नीता अंबानी भोपाल आई थीं। इसका फायदा उठाकर स्कूल प्रबंधन के मुख्य कर्ताधर्ताओं ने जमकर नियमों का उल्लंघन किया है। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार बिलाबोंग स्कूल प्रबंधन ने नीलबड़ गांव के नाले पर भी कब्जा किया है। 12 से 15 हजार वर्गफीट पर कब्जा किए जाने की सूचना सामने आ रही है। जिला प्रशासन इस संबंध में पूरी जानकारी जुटा रहा है।

परिवहन विभाग ने भी की अनदेखी
बिलाबोंग हाई इंटरनेशनल स्कूल की बसों की जांच के मामले में परिवहन विभाग भोपाल की भी अनदेखी सामने आई है। लोगों का कहना है कि समय-समय पर यदि आरटीओ का उड़नदस्ता स्कूल बसों की जांच करता, तो स्कूल बसों के बंद सीसीटीवी कैमरों की जानकारी सामने आ जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बड़ा और रसूखदार स्कूल होने के कारण परिवहन विभाग इन स्कूल की बसों पर बहुत कम ही जांच-पड़ताल करते हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सामने आ रही घटनाओं को लेकर जिला कांग्रेस भोपाल के नेतृत्व में गत दिवस कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इसके अनुसार स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं या नहीं, इनकी मॉनिटरिंग सहित अन्य गतिविधियों को लेकर शहर के सभी स्कूलों की जांच कराई जाए। हर महीने औचक निरीक्षण किया जाए।

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