CM शिवराज ने काशी जाने वाली ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

भोपाल
सात लाख लोगों को तीर्थ दर्शन करा चुके मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब नई प्लानिंग और सुविधाओं के साथ एक बार फिर प्रदेश के वृद्धजनों के लिए श्रवण कुमार बने हैं। शिवराज ने पचमढ़ी चिंतन शिविर में लिए गए निर्णय के बाद पहली तीर्थ दर्शन टेÑन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और फैसले के मुताबिक पहली यात्रा में धार्मिक न्यास मंत्री उषा ठाकुर भी 974 तीर्थयात्रियों के साथ काशी विश्वनाथ दर्शन के लिए गई हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना मंगलवार से फिर शुरू हो गई। इसके अंतर्गत पहली तीर्थ-दर्शन ट्रेन राजधानी के रानी कमलापति स्टेशन से काशी (वाराणसी) के लिए रवाना की गई। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ इस टेÑन को हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री उषा ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास और प्रभारी मंत्री भोपाल भूपेन्द्र सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग भी मौजूद रहे। आज रवाना हुई पहली तीर्थदर्शन यात्रा में भोपाल और सागर संभाग के 974 यात्री शामिल हैं।

चार संकल्प
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान काशी-विश्वनाथ दर्शन के लिए जा रहे बुजुर्ग तीर्थ यात्रियों चार संदेश दिए है। उन्होंने कहा कि  जब वे तीर्थ यात्रा से वापस लौटे तो इसका पालन करे। एक धरती को बचाने के लिए साल में एक पेड़ लगाए, दूसरा लोगों को नशा न करने के लिए प्रेरित करे, तीसरा बेटियों को भी उतना मान-सम्मान दे जितना बेटों को देते है। और चौथा काम वे यह करे कि पानी और बिजली बचाने के लिए खुद भी जुटे और दूसरों को भी प्रेरित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की जनता खुशहाल हो, आनंद मय हो इसके लिए राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

प्रदेश की जनता को चारों सुख दे रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में चार सुख जरुरी है। पहला सुख निरोगी काया इसके लिए हम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य की सुविधाएं मुहैया करा रहे है। दूसरा सुख लोगों को रहने के लिए मकान मिल जाए। बाहुबलियों, प्रभावकारी लोगों ने गरीबों के मकान जमीने हथिया ली,  उनसे छुड़ाकर हम गरीबों में बांट रहे। भोपाल में साढ़े तीन सौ करोड़ की जमीन पर कब्जा कर लिया था।  उसे हमने छुड़ाया है। लोगोें के मकान बन जाए,  इसके लिए प्रयास कर रहे है। शरीर ठीक रहे उससे काम नहीं चलता मन भी प्रसन्न रहे। इसके लिए अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन करते, आनंद उत्सव मनाते है। संस्कृति विभाग अलग-अलग आयोजन करता है। बुद्धि के सुख के लिए स्कूल-कॉलेज खोल रहे ताकि बुद्धि का विकास हो देश आगे बढ़े। चौथा सुख आत्मा प्रसन्न रहे। दूसरों का भला करने से, भूखे को भोजन, प्यासे को पानी, बिना पढ़े को पढ़ा दो, आत्मा का सुख मिलता है भगवान के दर्शन से।

 

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