कोयला संकट: बिजली के साथ सफर में भी कटौर्ती, बंद कोयला खदानें फिर शुरू करने राज्यों की पंचायत

भोपाल
कोयला संकट के बीच केंद्र और राज्य सरकारें एक्टिव हो गए हैं। रेलवे जहां यात्री ट्रेनें तक रद्द करके थर्मल पॉवर तक कोयला पहुंचाने की कोशिश में जुटी है, वहीं राज्य सरकारें बंद पड़ी कोयला खदानों को शुरू करने पर मुंबई में एकजुट हुई हैं। इसमें मध्यप्रदेश के भी अधिकारी शामिल हैं।  दूसरी ओर मध्यप्रदेश के जबलपुर में उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी हानि को कम करने पर मंथन किया जा रहा है। इसमें प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों के एमडी समेत कई एक्सपर्ट शामिल हो रहे हैं।

कोयला संकट से उत्पन्न बिजली संकट ने केंद्र के साथ राज्य सरकार की नींद उड़ा रखी है। इसी के चलते निजी क्षेत्र से निवेश आकर्षित करने के लिए केंद्रीय कोयला मंत्रालय शुक्रवार को एक इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन मुंबई में करने जा रहा है जिसमें मध्य प्रदेश के माइनिंग अफसरों को भी बुलाया गया है।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी करेंगे। बैठक में रेवेन्यू शेयरिंग के तहत कोल इंडिया की बंद खदानों को फिर से शुरू करने, कोल गैसीफिकेशन आदि पर चर्चा होगी। कोल इंडिया और फिक्की के सहयोग से आयोजित की जाने वाली इस बैठक को कोयला, खान और रेल राज्यमंत्री रावसाहेब दानवे भी संबोधित करेंगे। इस निवेशक सम्मेलन को सीआईएल और फिक्की की सहभागिता में कोयला मंत्रालय की ओर से आयोजित किया जाएगा। बैठक में शामिल होने एमपी से अफसर मुंबई पहुंचे हैं।

गौरतलब है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के साथ जुड़े बिजली संयंत्रों के पास 28 अप्रैल को नौ दिनों का कोयला स्टाक था। कोल इंडिया ने दो मई को कहा था कि बिजली क्षेत्र को उसकी कोयला आपूर्ति अप्रैल 2022 में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 15.6 फीसदी तक बढ़ी है। कोल इंडिया ने इसके साथ ही कहा था कि वह आने वाले महीनों में विशेष रूप से बिजली संयंत्रों के लिए आपूर्ति बढ़ाने की योजना बना रही है।

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