शिक्षा की पहुँच बढ़ाने में दूरवर्ती शिक्षा प्रभावी साधन : राज्यपाल पटेल

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विश्वविद्यालय अधिक से अधिक मूक प्लेटफॉर्म के लिए पाठ्यक्रम तैयार करें, जो छात्र-छात्राओं को जरूरी कौशल और ज्ञान से लैस करें। दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए भी रोजगार-स्व-रोजगार की संभावनाएँ ऑनलाइन कोर्सों में तलाशी जायें। उन्होंने कहा कि रोजगार, व्यवसाय आधारित और कौशल संवर्धन के पाठ्यक्रम, विज्ञान, टेक्नोलॉजी, अकादमिक क्षेत्र और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार बनाने के लिए उद्योगपतियों और नियोजकों के साथ चर्चा कर, तैयार किए जाएँ।

राज्यपाल पटेल मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा नैक की तैयारियों पर आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन-सत्र को राजभवन से ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सभी विद्यार्थियों का हित शिक्षण संस्थाओं की प्रथम प्राथमिकता है। यह उनका दायित्व भी है कि शिक्षा सहज, सुलभ, कम से कम खर्चे वाली और बंधन मुक्त हो। मध्यप्रदेश जैसे विशाल भू-भाग वाले प्रदेश में कम खर्चीली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच बढ़ाने में दूरवर्ती शिक्षा प्रभावी साधन है। शिक्षा की सार्थकता ज्ञान, संस्कार के साथ जीवन उपयोगी होने में है। वर्तमान समय ज्ञान और तकनीक के तेजी से बदलाव का है, जिसमें डिग्री की प्रासंगिकता के लिए निरंतर अपडेशन आवश्यक है। इसी मंशा से नई शिक्षा नीति में मल्टी एंट्री, मल्टी एक्ज़िट की व्यवस्थाएँ की गई हैं। जरूरी है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता और पहुँच बढ़ाने के कार्य, सही नीति और नीयत के साथ किए जाएं।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा सबके विश्वास, सबके साथ और सबके प्रयासों से समावेशी विकास का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने नई शिक्षा नीति में युवाओं को बंधन मुक्त शिक्षा के द्वारा तेजी से बदलती दुनिया के अनुसार सक्षम बनने का अवसर दिया है। नीति की सफलता के लिए शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालयों को नॉलेज जनरेशन और ट्रांसमिशन के केंद्र बनाना होगा। शिक्षा संस्थान, छात्र-छात्राओं के लिए जीवन की अनंत ऊँचाइयों को छूने की क्षमता देने के लाँच-पेड बनें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला, नैक के सात मापदण्डों के अनुसार शिक्षण संस्थाओं के व्यापक विकास और छात्र हित के विभिन्न आयाम पर प्रतिभागियों के दृष्टिकोण को सकारात्मक और नई शिक्षा नीति को लागू करने में सक्षम और सक्रिय बनाने में सफल होगी। वंचित और दूरस्थ क्षेत्रों में सुलभ, स्तरीय, रोजगारपरक और सार्थक शिक्षा प्रदान करने के प्रयासों का मंच बनेगी।

मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. स्मिता राजन ने कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कुलपति डॉ. जयंत सोनवलकर ने बताया कि कार्यशाला का आयोजन नैक की मूल्यांकन पद्धति के मार्गदर्शन के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि परिणाममूलक शिक्षा के लिए नैक की ग्रेडिंग कराया जाना जरूरी है। इससे संस्था की कार्य-पद्धति, शिक्षा-पद्धति और विद्यार्थियों के लिए किए गए प्रयासों का मूल्यांकन होता है। अन्य संस्थाओं के द्वारा किए जा रहे नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों की जानकारी भी मिलती है, जो संस्था के उन्नयन में सहयोगी होती है। विश्वविद्यालय के कुल चिव डॉ. एल.एस. सोलंकी ने आभार माना।

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