मिसाल! कभी करती थी दूसरे के खेतों में काम, अब है अपना व्यापार: कड़कनाथ ने बदली आदिवासी महिला की किस्मत

 रीवा
 
लोगों की जमीन अधिया पर लेकर परिवार के साथ गुजर बसर करने वाली सोनिया आदिवासी अब न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हो गई है बल्कि अपने पति की मजदूरी भी छुड़वा कर उन्हे अपने साथ काम में लगा लिया है। कड़कनाथ के उत्पादन ने उनकी जिंदगी बदल दी है अधिया में खेतों में काम करने वाली महिला अब दूसरी महिलाओं के लिए एक मिशाल हैं। इस व्यवसाय से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है और इस व्यवसाय के लिए वो लोगों को जागरूक भी कर रही हैं। जिससे उनकी तरह ही दूसरों की भी तकदीर बदल सके।

कहते है कुछ करने की लगन और जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है और इस बात को सही साबित किया है रीवा जिले की सेमारया तहसील के मौहरा गांव की रहने वाली सोनिया ने जो अब अपने समाज और गांव के लिये मिसाल बन गई है। आदिवासी महिला सोनिया अब कड़कनाथ का उत्पादन कर हर माह औसतन 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। पहले यह परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर था। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी नसीब होती थी।

अपने पति के साथ सोनिया गांव में आधा-एक एकड़ खेत अधिया में लेकर गुजर बसर कर रही थी। गुजारा न होने पर पति गुजरात के सूरत में मजदूरी करने चला गया। सोनिया खेत में काम कर बच्चे को पालती रहीं। आदिवासी महिला अब चूजे तैयार कर अंडे और कड़कनाथ बेचने का काम बखूबी संभाल रही हैं। उसने सूरत से अपने पति को वापस बुलाकर उसकी मजदूरी छुड़वाकर उसे भी अपने साथ काम पर लगा लिया है।
 
सोनिया की मानें तो वह अपना व्यवसाय और बढ़ाना चाहती हैं। उनका कहना है कि वह इस व्यवसाय को बड़े रूप में करना चाहती है। सोनिया की मंशा चालीस से पचास हजार रुपये प्रतिमाह कमाने के साथ लोगों को इस व्यवसाय से जोड़ने की है। जिससे और लोगों का भी घर चल सके और उन्हें भी रोजगार मिल सके। सोनिया ने अभी तक छोटे और बड़े मिलाकर लगभग पांच सौ से ज्यादा कड़कनाथ बेच दिए हैं। चूजों और कड़कनाथ को गर्मी, ठण्ड और बारिश में किस स्थिति में किस सावधानी के साथ रखना है यह जानने के लिए वह वेटनरी चिकित्सकों से भी लगातार संपर्क करती रहती है। सोनिया आदिवासी कृषि विज्ञान केंद्र में एक प्रशिक्षण ण के दौरान कृषि वैज्ञानिको से मिली और अपने हालातो के बारे में बताया था जिसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने उन्हें कड़कनाथ के उत्पादन की सलाह दी जिस पर वह तैयार हो गईं। कृषि वैज्ञानिकों ने उसे पशुपालन विभाग से कुछ चूजे दिलवाये और उन्हें सहेजने और बड़ा करने का मार्गदर्शान लगातार देते रहे।

सोनिया के पास इस समय काफी संख्या में छोटे और बड़े कड़कनाथ मौजूद है। कड़कनाथ के व्यवसाय से आमदनी होने पर महिला ने चार कमरे का मकान भी बना लिया है। साथ ही कड़कनाथ को रखने के लिए पहले कच्चा बाड़ा था उसे भी पक्का बना लिया है। इस व्यवसाय से जितनी आय हो रही है उसका आधा हिस्सा वो अपने व्यवसाय पर खर्च कर रही है। मुर्गों की अन्य प्रजातियों की तुलना में कड़कनाथ की कीमत वैसे भी ज्यादा है। बाजार में यह कड़कनाथ 800 से 1000 रुपये में मिलता है। लेकिन सोनिया आदिवासी यह कड़कनाथ 600 से 700 रुपये में दे देती है इसके अलावा वह 10 से 15 रुपये में अंडे भी दे रही।

 

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