गौपालन के बिना खेती संभव नहीं है – कलेक्टर

खेती और पशुपालन से ही मिलेगी आजीविका – कलेक्टर

रीवा
उप संचालक पशुपालन कार्यालय सभागार में गौसेवकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का समापन करते हुए कलेक्टर मनोज पुष्प ने कहा कि आज आवारा पशु खेती के लिए सबसे बड़ी समस्या हैं। खेती भी किसान की है और पशु भी किसान के ही हैं, आवारा मवेशी से जो सबसे अधिक पीड़ित हैं उनके पास ही इस समस्या का समाधान भी है। रासयनिक खाद के बड़ी मात्रा में उपयोग से हमारे खेतों की उर्वरक शक्ति नष्ट हो रही है। दो-चार साल में उत्पादन इतना घट जायेगा कि हमे खेती छोड़नी पड़ेगी। यदि खेत से अच्छी मात्रा में और अच्छी गुणवत्ता के अनाज प्राप्त करने हैं तो हमें पशुपालन को अपनाना होगा। गाय का गोबर ही माटी की उर्वरक शक्ति वापस लौटा सकती है। गौपालन के बिना खेती संभव नहीं है। आज बेरोजगारी बहुत बड़ी समस्या है इसका कारण है कि हमने खेती को भूला दिया है। खेती और पशुपालन से ही सबसे अधिक आजीविका मिलेगी। मिट्टी और गोबर में हाथ-पैर गंदे किये बिना खेती और पशुपालन संभव नही होगा।

    कलेक्टर ने कहा कि गौसेवकों को जिले भर में संचालित गौशालाओं के माध्यम से गौसेवा का अवसर दिया जायेगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। इसके लिए प्रस्ताव बनाया जा रहा है। गौसेवक पशुपालकों को मवेशियों को घर में बांधकर रखने की समझाइश दें। धान और गेंहू की लगातार खेती अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गयी है। इस वर्ष जिले के 2 हजार किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है। धान का रकवा पिछले साल की तुलना में 70 प्रतिशत रह गया है। धान के स्थान पर किसान दलहन, तिलहन एवं सब्जी की खेती को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आवारा पशुओं को सड़कों से हटाने के लिए कठोर कार्यवाही की जा रहीं हैं। अब तक दर्जन भर से अधिक पशुपालकों के विरूद्ध एफआईआर करायी गयी है। समारोह में गौसंवर्धन समिति के अध्यक्ष श्रीमती नंदनी तिवारी ने कहा कि गौसेवक तथा मैत्री कार्यकर्ता शासन की योजनाओं की जानकारी पशुपालकों तक पहुंचाये। गौ संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। जिला पंचायत की कृषि समिति की अध्यक्ष श्री योगेन्द्र सिंह ने कहा कि गाय से लाभ और हानि दोनों हो रही है। हम गाय के दूध और गोबर का उपयोग करने के साथ-साथ गौ माता को घर में रखकर उसकी सेवा करें। किसी भी पशु को खुला न छोड़े। उन्होंने गौसेवकों का मानदेय बढ़ाने का सुझाव दिया।

    कार्यक्रम में उप संचालक पशुपालन डॉ. राजेश मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गौसेवक पशुपालन विभाग की रीढ़ हैं। गौसेवक तथा मैत्री के माध्यम से ही विभाग की गतिविधियों और योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंच रहा है। जिले में 110 मैत्री कार्यकर्ता तथा 508 गौसेवक हैं। इनके द्वारा पशुओं का उपचार, कृत्रिम गर्भाधान आदि की सेवाएं देने पर मानदेय प्राप्त होता है। आजीविका मिशन की महिला स्वसहायता समूह की पशु सखी के रूप में प्रशिक्षण दिया जायेगा। समारोह में 5 गौसेवकों को कृत्रिम गर्भाधान किट वितरण किया गया। इसके बाद कलेक्टर तथा अन्य अतिथियों ने कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. मनु दीक्षित द्वारा आभार प्रदर्शन से हुआ। कार्यक्रम में पशु चिकित्सा अधिकारी एवं गौसेवक उपस्थित रहे।

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