गांधी सागर बांध: समय पर मरम्मत करें तो टूटने से बचेगा

भोपाल
62 साल पहले 1960 में चंबल नदी पर बना गांधी सागर बांध अब बूढ़ा हो चला है। प्रशासन की अनदेखी से इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है। 2008 में कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में जता दिया था कि अगर समय पर बांध की मरम्मत नहीं हुई तो बांध टूटना तय है। रिपोर्ट मिलने के बाद कागजी कार्यवाही और प्रस्ताव तो बने लेकिन फील्ड वर्किंग कुछ नहीं हुई।

तीन साल पहले आई बाढ़ के बाद मंदसौर जिले का गांधी सागर बांध अब खतरा बन गया है। बांध की सुरक्षा को लेकर कराई गई जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा इस बांध की सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जाने से आने वाले समय में यह जनजीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस गंभीर मसले पर खास बात यह सामने आई है कि राज्य शासन ने बांध की हालत नाजुक होने की आधी अधूरी जानकारी मंदसौर कलेक्टर को भेजी है। ऐसे में बांध की सुरक्षा के लिए क्या काम किए जाने हैं? अभी यह बताने की स्थिति में मंदसौर जिला प्रशासन नहीं है।

मंदसौर जिले के भानपुरा तहसील में स्थित गांधी सागर बांध को लेकर शासन को भेजी रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1960 में चंबल नदी पर बांध का निर्माण व गठन किया गया था। गांधी सागर बांध को बने 62 साल पूरे हो गए हैं। वर्ष 2008 में कैग द्वारा गांधी सागर बांध को लेकर दी गई रिपोर्ट में बताया गया था कि इस बांध की मरम्मत समय पर नहीं हुई तो बांध का टूटना तय है। इससे मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के आठ जिलों में रहने वाली 40 लाख से अधिक की आबादी प्रभवित होगी। कैग रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने बांध का निरीक्षण कराया और 276 करोड़ रुपए के प्रस्ताव बांध पुनर्वास और सुधार परियोजन के अंतर्गत बनाए गए लेकिन इस प्रस्ताव पर क्रियान्वयन के लिए विचार नहीं किया गया।

रिपोर्ट के इससे आगे के हिस्से गायब
शासन द्वारा यह रिपोर्ट मंदसौर कलेक्टर, जल संसाधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों को भेजी गई है लेकिन इसके आगे रिपोर्ट में क्या कहा गया है? यह किसी अधिकारी और विभाग के पास नहीं पहुंचा है। मंदसौर कलेक्टर गौतम सिंह का भी कहना है कि डेढ़ सौ से अधिक पेज की रिपोर्ट होने की जानकारी मिली है पर जो जानकारी आई है उसमें यह उल्लेख नहीं है कि बांध की सुरक्षा के लिए क्या करना है? इसके लिए शासन से पत्राचार कर पूरी रिपोर्ट भेजने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। उधर जल संसाधन विभाग के अफसरों के मुताबिक सीडब्ल्यूसी की टीम ने दौरे के बाद बांध में किसी तरह की दिक्कत नहीं बताई है।

केंद्र की टीम ने दी थी क्षतिग्रस्त होने की चेतावनी
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2006 में आई बाढ़ के कारण बांध का जलस्तर काफी बढ़ गया था और 16.69 लाख क्यूसेक से अधिक पानी एक साथ छोड़ना पड़ा था। इसका असर जनजीवन पर भी पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2019 में आई भारी बाढ़ के कारण बांध के ऊपर 2.06 मीटिर से अधिक ऊंचाई से पानी बहने लगा था और बिजली घर में भी पानी घुस गया था। इसके बाद बांध क्षतिग्रस्त होने की संभावना को देखते हुए केंद्रीय टीम द्वारा बांध का निरीक्षण कर चेतावनी दी गई थी। इस पर प्रदेश सरकार की ओर से जवाब दिया गया था कि बांध के मुद्दे पर एमपी व राजस्थान और भारत सरकार द्वारा निर्णय लिया जाना है। इसमें बांध के डाउन स्ट्रीम (जल भराव क्षेत्र) एरिया में अतिरिक्त पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए स्पिलवे स्थापित किया गया है लेकिन इसकी क्षमता 4.86 लाख क्यूसेक पानी की है। बांध से पानी निकासी क्षमता 20 लाख क्यूसेक तक हो चुकी है।

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