लोकायुक्त की छापामार कार्यवाही,नामांतरण करने के एवज में पटवारी ने मांगी रिश्वत, रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया

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लोकायुक्त पुलिस रीवा टीम ने विगत दिवस दबिश कार्यवाई करते हुए एक पटवारी को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हांथों ट्रैप किया है। आरोपी पटवारी द्वारा ये रिश्वत एक किसान से भूमि का नामांतरण करने के लिए ली जा रही थी। लोकायुक्त पुलिस ने पीडित किसान की शिकायत को सत्यापित करने के बाद आज पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के तहत तहसील चुरहट अंतर्गत ग्राम दुअरा में हल्का पटवारी को दबोचने के लिए दबिश दी। लोकायुक्त पुलिस टीम द्वारा रिश्वतखोर पटवारी को रंगे हांथों दबोचने की खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई। जिसके बाद राजस्व विभाग के रिश्वतखोर अधिकारियों एवं कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। मिली जानकारी के अनुसार लोकायुक्त पुलिस रीवा की टीम पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार डीएसपी राजेश पाठक के नेतृत्व में दुअरा गांव पहुंची। लोकायुक्त पुलिस टीम के सभी सदस्य सिविल डे्रस में थे। उनके द्वारा पीडि़त किसान धीरेन्द्र सिंह पिता राजकुमार सिंह निवासी दुअरा से संपर्क किया गया तथा हल्का पटवारी गोरखनाथ विश्वकर्मा को 5 हजार रुपए रिश्वत देने के लिए बुलाने को कहा।

किसान धीरेन्द्र सिंह के बुलाने पर पटवारी गोरखनाथ विश्वकर्मा दुअरा गांव में आम के पेंड़ के नीचे बुलाया गया। यहां सिविल ड्रेस में मौजूद लोकायुक्त पुलिस टीम के कुछ कर्मचारी भी किसान धीरेन्द्र सिंह के साथ पटवारी से मिलने के लिए पहुंचे। हल्का पटवारी द्वारा नामांतरण करनें के लिए 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई। धीरेन्द्र सिंह ने 5 हजार रुपए रिश्वत हल्का पटवारी के हांथों में दी। हल्का पटवारी संतुष्ट होने के बाद जैसे ही रिश्वत की राशि जेब में डालने लगा मौजूद लोकायुक्त पुलिस टीम के कर्मचारियों ने उसे दबोच लिया। इस दौरान लोकायुक्त पुलिस टीम द्वारा दो गवाहों को भी अपने साथ रखा गया था।

आरोपी हल्का पटवारी के रिश्वत लेते रंगे हांथों पकड़े जानें के बाद लोकायुक्त पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार करते हुए आगे की कार्यवाई के लिए  रेस्ट हाउस चुरहट लेकर पहुंची। यहां लोकायुक्त पुलिस टीम द्वारा शाम तक रिश्वत लेने के मामले में अपनी कागजी कार्यवाई को  पूर्ण किया गया। तत्संबंध में शिकायतकर्ता किसान धीरेन्द्र सिंह द्वारा मीडिया से चर्चा के दौरान कहा गया कि हल्का पटवारी गोरखनाथ विश्वकर्मा द्वारा भूमि का नामांतरण नहीं किया जा रहा था। इसके लिए वह काफी समय से पटवारी के पास चक्कर काट रहे थे। वह तरह-तरह की बहानेबाजी कर रहा था। बाद में उसके द्वारा नामांतरण करनें के लिए रिश्वत की मांग की गई।

6 हजार रुपए में नामांतरण की कार्यवाई करनें के लिए पटवारी तैयार हुआ। जिसमें से 1 हजार रुपए उसको  पूर्व में ही दे दिए गए थे। धीरेन्द्र सिंह ने कहा कि शेष 5 हजार रुपए लेने के लिए वह लगातार दबाव बना रहा था। जिसके चलते मजबूर होकर उन्हें लोकायुक्त पुलिस के पास शिकायत करनी पड़ी। उनका कहना था कि सरकार द्वारा नामांतरण कार्यवाई के लिए लगातार राजस्व अमले को निर्देशित किया जा रहा है कि अभियान चलाकर किया जाए। लेकिन वस्तुस्थिति ये है कि हल्का पटवारियों द्वारा नामांतरण के मामले में खुलेआम रिश्वत की मांग की जाती है।   प्रश्न यह है कि आए दिन कहीं ना कहीं अधिकारी कर्मचारी लोकायुक्त पुलिस के हत्थे चढ़ रहे हैं फिर भी रिश्वतखोर कर्मचारी अधिकारी अपनी नौकरी दांव पर लगाकर रिश्वत लेने से बाज नहीं आ रहे हैं क्या यह समस्या कभी समाप्त होगी अथवा नहीं यह अपने आप में बड़ा प्रश्न है.

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