साल के अंत तक एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा, डेढ़ लाख तक आएगा खर्च

भोपाल
 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल में पिछले महीने बोन मैरो ट्रांसप्लांट शुरू किए जाने के बाद इस साल के अंत तक किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए ओटी भी तैयार हो गया है। बता दें कि यहां पर किडनी रोग विशेषज्ञ पहले से थे, ट्रांसप्लांट सर्जन नहीं होने के वजह से यह काम शुरू नहीं हो पा रहा था। अब एम्स प्रबंधन का इस साल का सबसे बड़ा लक्ष्य किडनी ट्रांसप्लांट ही है। ट्रांसप्लांट शुरू करने के दो महीने पहले से मरीजों को चिन्हित करने के लिए विशेष ओपीडी शुरू की जाएगी। इसमें मरीज और किडनी देने वाले दोनों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद सभी जांचें कराई जाएंगी। सब कुछ सही मिलने पर ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा।

यहां पर किडनी ट्रांसप्लांट एम्स के दिल्ली के रेट पर किया जाएगा। अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपये खर्च आएगा। जबकि निजी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट पर करीब आठ लाख रुपये खर्च लगता है।

बता दें कि प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में अभी सिर्फ हमीदिया और जबलपुर के मेडिकल कालेज में ही किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता है। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग की तैयारी प्रदेश के सभी पुराने छह सरकारी मेडिकल कालेजों में ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की है।

एक सीटी स्कैन मशीन और आएगी

एम्स भोपाल में अभी सिर्फ एक सीटी स्कैन मशीन है। इसमें हर दिन 60 मरीजों का सीटी स्कैन किया जाता है। मशीन के बिगड़ने की स्थिति में सीटी स्कैन बंद हो जाता है। मरीजों को निजी अस्पतालों में करीब चार हजार रुपये देकर सीटी स्कैन कराना पड़ता है। ऐसे में यहां के लिए अब एक और सीटी स्कैन मशीन लगाने की तैयारी है। रेडियो डायग्नोसिस विभाग की तरफ से इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि दो महीने के भीतर मशीन आ जाएगी। यहां पर एमआरआइ की पहले से ही दो मशीन हैं। एक मशीन किसी कारण से बंद हो जाती है तो दूसरी मशीन से काम चलाया जाता है। अस्पताल की अधीक्षक डा. मनीषा श्रीवास्तव ने बताया कि नई सीटी स्कैन मशीन लगाने और किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारी चल रही है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी अनुमतियां ली जा रही हैं।

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