मध्यप्रदेश पर्यटन ने फ्रांस में दिखाई अपने समृद्ध विरासत और विविध वन्य-जीवन की झलक

भोपाल

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड (एमपीटीबी) ने पेरिस के पोर्ट डी वर्साय में अंतर्राष्ट्रीय और फ्रेंच ट्रेवल मार्केट (आईएफटीएम) टॉप रेसा में भाग लिया। मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक शिव शेखर शुक्ला ने किया। ट्रेवल मार्ट में दुनिया के प्रमुख टूर ऑपरेटर, ट्रेवल एजेंट सहित विभिन्न हितधारकों ने हिस्सा लिया। यह B2B इवेंट 20 से 22 सितंबर तक चला। पहले दिन प्रमुख सचिव शुक्ला ने यूरोप के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें की और फ्रांसीसी मीडिया के साथ प्रदेश में पर्यटन संभावनाओं की जानकारी साझा की। प्रदर्शनी में 200 से अधिक देश और 1700 से ज्यादा ब्रांड्स मौजूद थे। 34,000 से ज्यादा पर्यटन पेशेवरों ने भाग लिया और 150 सम्मेलन-सत्र किए गए।

मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हुए प्रमुख सचिव शुक्ला ने कहा, 'मध्यप्रदेश को 'हिंदुस्तान का दिल' कहा जाता है। पर्यटन की दृष्टि यह एक संपन्न राज्य है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर, वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध, दो ज्योतिर्लिंगों, 3 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और 11 राष्ट्रीय उद्यान हैं, जिनमें 6 टाईगर रिजर्व और 24 वन्य-जीव अभयारण्य शामिल हैं। अब कुछ ही माह बाद आप चीतों को भी प्रदेश के जंगलों में दौड़ते देख सकेंगे। मध्यप्रदेश को 'टाइगर स्टेट ऑफ इंडिया’ 'लेपर्ड स्टेट' और 'घड़ियाल स्टेट' का गौरव प्राप्त है। पर्यटन बोर्ड सक्रिय रूप से इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने में प्रयासरत है। साथ ही स्थानीय समुदाय, संस्कृति का संरक्षण और विकास के साथ कार्बन फुटप्रिंट को न्यूयनतम करना इसकी प्राथमिकता है।

पर्यटन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर युवराज पडोले ने यूरोप से प्रदेश में भ्रमण के लिए आने वाले पर्य़टकों की संख्या बढ़ाने के लिए अपनाई जा रही रणनीति पर चर्चा की। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीएसटीडीसी) ने इस आयोजन में अपने होटल और रिसॉर्ट्स की श्रृंखला प्रस्तुत की।

23 सितंबर को पेरिस में मनेगा "एमपी डे"

टूरिज्म बोर्ड द्वारा भारतीय दूतावास, पेरिस के सहयोग से 23 सितंबर को "मध्यप्रदेश दिवस" (एमपी डे) मनाया जाएगा। इसमें पर्यटक गंतव्य और रूचि के स्थानों पर ऑडियो-विजुअल प्रेजेन्टेशन शामिल है। बोर्ड एक रोड-शो भी करेगा। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

 

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