सीधी में नहीं चला जादू,नगर पालिका सीधी एवं नगर परिषद चुरहट में कांग्रेस की चली सुनामी

सीधी
जिले में आज नगरीय चुनावों के घोषित नतीजे में कांग्रेस ने जहां जीत का परचम लहराया है वहीं भाजपा नगर परिषद मझौली को छोड़कर अन्य जगहों में अपनी एक तरफा अच्छी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी। नगर पालिका सीधी एवं नगर परिषद चुरहट में कांग्रेस की सुनामी लहर चलती दिखी जिसके चलते नगर पालिका सीधी के 24 वार्डों में से 14 वार्डों में तथा नगर परिषद चुरहट के 15 वार्डों में 10 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने बड़ी जीत हासिल की।

ये अवश्य था कि नगर परिषद मझौली में ही भाजपा के कमल की आंधी छाई रही। यहां 15 वार्डों में से 11 वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों ने अपनी जीत दर्ज कराई। नगर परिषद रामपुर नैकिन के 15 वार्डों में से भाजपा के 8 एवं कांग्रेस के 7 प्रत्याशियों को जीत मिली।

भाजपा बैकफुट पर
सीधी जिले में आज घोषित नगरीय निकाय के नतीजों ने भाजपा को हैरत में डाल दिया है। भाजपा के बड़े नेताओं को इतनी करारी शिकस्त की उम्मीदें नहीं थीं। ये अवश्य है कि विधानसभा क्षेत्र धौहनी में ही भाजपा का जादू अभी चल रहा है। जो कि नगर परिषद मझौली के घोषित नतीजों में भी स्पष्ट रूप से नजर आया है अन्य जगहों में भाजपा अपना जनाधार तेजी के साथ खोती जा रही है। ऐसा आभास होता है कि शहरी क्षेत्र के मतदाता भाजपा की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं रहे। इसी वजह से उनके द्वारा बदलाव का जनादेश कल स्पष्ट रूप से सुनाया गया है।

कांग्रेस में जश्न का आलम
नगरीय निकाय चुनाव में जनता के आए जनादेश से कांग्रेस के नेताओं में जहां भारी उत्साह दिख रहा है वहीं भाजपा खेमे में बड़ी मायूसी छाई हुई है। चर्चा के दौरान भाजपा के कुछ पदाधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि नगरीय निकाय का चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होता है फिर भी वो अपनी हार पर मंथन करेंगे। शिवराज सिंह चौहान

काजल वर्मा के अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना
नगर पालिका परिषद सीधी का अध्यक्ष पद पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित है। आज घोषित नतीजों में नगर पालिका के वार्डों से कांग्रेस की ओर से दो पिछड़ा वर्ग की महिलाएं निर्वाचित हुई हैं। इनमें वार्ड क्रमांक 3 से निर्वाचित कांग्रेस प्रत्याशी काजल वर्मा के अध्यक्ष बनने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। काजल वर्मा शहर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता एवं वरिष्ठ नेता विनोद वर्मा की पुत्रबधू हैं। उनका नाम चुनाव से पहले ही अध्यक्ष के लिए चल रहा था। वहीं वार्ड क्रमांक 17 से निर्वाचित कांग्रेस प्रत्याशी सोनम सोनी ने चुनाव के ठीक पहले ही कांग्रेस की सदस्यता ली थी। इस वजह से उनके अध्यक्ष बनने की संभावना ना के बराबर बताई जा रही है। नगर पालिका परिषद सीधी में कांग्रेस को भारी जीत मिलने के बाद से पार्टी के नेताओं में खुशी की लहर है। अब उनके द्वारा नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष को लेकर भी अपनी सक्रियता शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जिससे अध्यक्ष पद के लिए संभावित नाम को आगे करके निर्वाचित कराने की पहल शुरू की जाय।

आप पार्टी की सीधी में हुई धमाकेदार इन्ट्री
आम आदमी पार्टी ने नगर पालिका सीधी के पार्षद पद के चुनाव में वार्ड 21 से जीत हासिल कर धमाकेदार इन्ट्री सीधी जिले में की है। ये वार्ड आरक्षित होने के बावजूद यहां के मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती शीला बंशल को अपना भरपूर समर्थन दिया जिसके चलते वो नगरीय निकाय चुनाव में सीधी जिले से अपनी धमाकेदार जीत दर्ज करा सकी हैं। जानकारों के अनुसार नगर पालिका के चुनाव में वार्ड क्रमांक 21 आरक्षित था।

इस वजह से इस वार्ड से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी की जीत की संभावना को कम करके आंका जा रहा था किन्तु यहां आम आदमी पार्टी का झाडू काफी तेजी के साथ चला और चुनाव मैदान में उतरे अन्य प्रत्याशियों के सारे समीकरण धराशायी हो गए। यहां के मतदाताओं ने आम आदमी पार्टी की नीतियों एवं प्रचार पर पूरी तरह से विश्वास किया तथा आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती शीला बंशल को अपना पूरा समर्थन दिया। नगर पालिका के चुनाव में आदमी पार्टी के अन्य प्रत्याशियों को जीत नहीं मिल सकी है।

कांग्रेस ने सामूहिक रूप से निकाला विजय जुलूस
नगर पालिका परिषद सीधी के आज घोषित हुए चुनाव में कांग्रेस को भारी जीत मिली है। नगर पालिका के 24 वार्ड में कांग्रेस के 14 वार्डों में प्रत्याशियों को जीत मिली है। वहीं भाजपा के 6 प्रत्याशियों को जीत मिली है। एक तरह से नगर पालिका के चुनाव में भाजपा का सूपड़ा साफ होना माना जा रहा है। नगर पालिका के चुनाव में प्रत्याशियों की जीत से उत्साहित कांग्रेस के बड़े पदाधिकारियों द्वारा सभी विजयी प्रत्याशियों का सामूहिक जुलूस आज शहर में निकाला गया।

भाजपा का नहीं दिखा जुलूस
भाजपा प्रत्याशियों की करारी हार से पार्टी के बड़े नेताओं में हताशा दिखी। पार्टी के बड़े नेता अपने विजयी प्रत्याशियों के विजय जुलूस में शामिल होना भी जरूरी नहीं समझे। इसी वजह से भाजपा के निर्वाचित प्रत्याशियों के अलग-अलग विजय जुलूस शहर में निकाले गए। विजय जुलूस में भी प्रत्याशी एवं उनके चंद समर्थकों की उपस्थिति ही नजर आई।

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