मामा शिवराज का अमला मुस्तैद, अपराधियों में खौफ का माहौल

भोपाल
चिन्हित अपराधों की मॉनिटरिंग शुरू होने के बाद से प्रदेश में अपराधियों में अब खौफ का माहौल नजर आने लगा है।  सभी मामलो में उच्च स्तर पर विवेचना हुई जिससे चिन्हित अपराधों के 70 फीसदी अपराधी दोषी साबित हुए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा अनुरूप अब प्रदेश में जघन्य और सनसनीखेज अपराध करने वाले अपराधियों की शामत आ गई है। बुलडोजर के साथ ही अपराधियों पर अब कानून का खौफ भी दिखाई देने लगा है। पुलिस की बेहतर इंवेस्टिगेशन के चलते प्रदेश में चिन्हित अपराधों में दोष साबित होने का प्रतिशत तेजी से उछला है। प्रदेश में  चिन्हित अपराधों के 70 प्रतिशत अपराधियों के खिलाफ दोष साबित हुआ और अब वे सलाखों के पीछे अपने दिन काट रहे हैं।

छिंदवाड़ा में 8 मामले चिन्हित किये गए थे। इनमें से एक छोटी बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला भी था। कुंडीपुरा थाना क्षेत्र के इस मामले को चिन्हित अपराधों की श्रेणी में रखा गया, पुलिस ने जल्द ही इसका चालान पेश किया। इसके बाद इस पर आरोपी पर दोष साबित हुआ। छिंदवाड़ा और सीहोर जिले में सबसे ज्यादा चिन्हित अपराध थे। दोनों जिलों में इनकी संख्या 8-8 थी। इन सभी मामलों में दोनों जिलों में शत प्रतिशत सजा का फैसला सामने आया है।

जांच का उच्च स्तर
भोपाल के एक मामले में नेत्रहीन महिला के साथ हुए दुष्कर्म में आरोपी को सजा दिलाने उसकी आवाज के कारण मिली। पीड़िता के घर पर लगे कैमरों में आरोपी की आवाज रिकॉर्ड हो गई थी। इस आवाज को संदेही की आवाज से मिलान लैब में करवाया गया। जहां पर आवाज संदेही की ही पाई गई। जिसे अदालत ने भी माना और अब आरोपी को सजा सुनाई जा चुकी है।  मंदसौर जिले के सितामऊ में दसवीं की छात्रा के साथ ज्यादती करने के मामले में पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में पीड़िता ने फैसला आने के बाद अभियोजन अधिकारी को राखी बांध कर न्याय मिलने पर संतुष्टि जाहिर भी की थी।

चोरी और डकैती के मामले भी चिन्हित किये गए
वहीं प्रदेश में संभवता पहली बार डकैती और चोरी के मामलों को भी चिन्हित अपराधों में शामिल किया गया था। शिवपुरी में डकैती के एक मामले को चिन्हित किया गया। इस जिले में एक मात्र यही अपराध चिन्हित की सूची में लिया गया था। इसमें सभी आरोपियों को सजा दिलाने में शिवपुरी पुलिस सफल रही। इसी तरह छिंदवाड़ में एटीएम तोड कर वारदात करने वाले मामले को चिन्हित किया गया। इस मामले में भी आरोपियों को सजा सुनाई गई।

201 मामलों में दिलाई सजा
इस वर्ष के शुरूआती तीन महीनों में चिन्हित अपराधों में सजा का प्रतिशत 70 फीसदी रहा। इस दौरान 286 चिन्हित अपराधों पर फैसला आया। इसमें से 85 मामलों में सजा नहीं मिल सकी, जबकि 201 मामलों में आरोपियों पर दोष सिद्ध हुआ। यह पिछले साल के शुरूआती तीन महीनों की तुलना में 7 फीसदी दोष सिद्धी के मामले ज्यादा रहे। इनमें से एक में मृत्यु दंड की सजा मिली। जबकि 145 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि 55 मामलों में अन्य कारावास हुआ।

ये रहे टॉप जिले
चिन्हित मामलों में दोष सिद्ध करवाने वाले जिलों में छिंदवाड़ा और सीहोर जहां टॉप पर हैं। वहीं भोपाल में सात मामले चिन्हित थे, यहां पर भी सभी चिन्हित अपराधों में अदालत ने सजा सुनाई। इसी तरह सीधी और खरगौन में 6-6 मामले चिन्हित अपराधों में शामिल किये गए थे। यहां भी सभी मामलों में सजा सुनाई गई। इसी तरह निवाड़ी, मंडला, बैतूल और खंडवा में 4-4 मामले चिन्हित अपराधों में शामिल किये गए थे,सतना में दो मामले, बुरहानपुर, शिवपुरी और श्योपुर में एक-एक मामला चिन्हित अपराधों में शामिल किया गया था। इन सभी में सजा सुनाई जा चुकी है।

ये रहे फिसड्डी जिले
चिन्हित अपराधों के मामले में सबसे फिसड्डी जिला हरदा रहा। हरदा में चिन्हित 6 अपराधों में फैसला आया, लेकिन इसमें से सिर्फ एक मामले में ही आरोपियों पर दोष सिद्ध हो सका। बाकी के मामलों में आरोपी बरी हो गये। इसी तरह सिवनी में सात अपराध चिन्हित किये गए थे। इनमें से चार में आरोपी दोष मुक्त हो गए। जबकि तीन मामलों में आरोपियों को सजा मिल सकी। नर्मदापुरम में 6 मामलों में से तीन चिन्हित अपराधों में ही सजा मिल सकी, बाकी के तीन मामलों में आरोपी बरी हो गए। इसी तरह उज्जैन में भी 12 चिन्हित अपराधों में से 6 में ही आरोपियों को सजा मिल सकी।

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