35 हजार 297 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा गेहूं देखरेख के बिना खराब

भोपाल
प्रदेश के किसानों को गेहूं के अच्छे दाम देने के लिए राज्य सरकार हर साल किसानों से करोड़ों रुपए का गेहूं खरीदती है। लेकिन इसके रखरखाव में के लिए जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई जिसके चलते 6 सालों में प्रदेशभर में 390 स्थानों पर रखा करोड़ों रुपए का पैतीस हजार 297 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खराब हो गया है।  यह गेहूं अब इंसानों के खाने के लायक नहीं रह गया इसके चलते अब इसे पशुओं के खाने और इंडस्ट्रिंयल उपयोग के लिए सरकार इस गेहूं को खुले बाजार के लिए नीलाम करेगी।

राज्य सरकार किसानों से 2015 रुपए क्विंटल की दर से गेहूं खरीद रही है, यदि यह गेहूं आज सुरक्षित रहता तो इसकी कीमत 711 करोड़ 24 लाख रुपए होती। लेकिन अब यह गेहूं डेढ़ से दो रुपए किलो के भाव से निजी कंपनियां खरीदेंगी। इस गेहूं को खरीदने के लिए सौ बिड आई है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेशभर में वर्ष 2015- से लेकर वर्ष 20-21 के बीच खरीदा गया गेहूं रखरखाव के अभाव में खराब हो गया है।

अब तक इस तरह खराब हुआ गेहूं
छिंदवाड़ा जिले के ओपन कैप चंदनवाड़ा चैरई में वर्ष 20-21 में खरीदकर रखा 10 हजार 980.105 टन गेहूं, हरेराम काटन इंडस्ट्री और गोपीनाथ वेयरहाउस में रखा वर्ष 20-21 का 951.489 टन गेहूं, छिंदवाड़ा के एमपी डब्ल्यूएलसी में वर्ष 16-17 में  रखा 5.36 टन गेहूं, इसके अलावा कटनी में  वर्ष 19-20 में खरीद कर रखा गया 1 हजार 619.15 टन गेहूं और इसी तरह वर्ष 20-21 में छिंदवाउÞा के ओपन कैप चंदनवाड़ा चैरई में रखा गया 4 हजार 685 मीट्रिक टन गेहूं और भोपाल, होशंगाबाद में वर्ष 2019 से 20 तक खरीदा गया गेहूं, सीहोर, राजगढ़, रायसेन, सागर,श्योपुर तथा सता जिलों में वर्ष 2015 से वर्ष 2020-21 के बीच खरीदा गया कुल मिलाकर 35 हजार 297 मीट्रिक टन गेहूं खराब हो गया है।

रखरखाव, परिवहन पर खर्च हो चुके करोड़ों रुपए
राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं का परिवहन कर उन्हे निजी गोदामों, भारतीय खाद्य निगम के गोदामों और अन्य गोदामों में रखती है। एक मीट्रिक टन गेहूं के रखरख्रााव पर सालाना 27 रुपए प्रति मीट्रिक टन प्रति वर्ष का खर्च आता है। इसी तरह गोदामों तक गेहूं पहुंचाने के लिए भी हर साल करोड़ों रुपए का खर्च होता है। इस हिसाब से परिवहन और भंडारण पर भी पांच साल में करोड़ों रुपए खर्च हो चुके है।

गेहूं खरीदने के लिए सौ बिड आईं
प्रदेश के विभिन्न जिलों में खराब हुए इस गेहूं को बेचने के लिए नागरिक आपूर्ति निगम ने ग्लोबल टेंडर जारी किए थे। कुल सौ बिड इस गेहूं को खरीदने के लिए आई है। इनमें से जो कंपनियां जिस जिले के गेहूं को अधिकतम दाम पर खरीदने को तैयार होंगी उन्हें यह गेहूं बेचा जाएगा।

खराब गेहूं की पांच क्वालिटी
राज्य सरकार ने खराब हो चुके इस गेहूं को पांच तरह की क्वालिटी बनाई है। फीड एक और दो का उपयोग पशु आहार के लिए किया जा सकेगा।  तीसरी फीड का उपयोग पोल्ट्री आहार के लिए किया जा सकेगा।  वहीं एक  क्वालिटी इंडिस्ट्रियल यूज और मैन्योर के लिए उपयोग की जा सकेगी। तथा पांचवी क्वालिटी केवल मैन्योर के उपयोग में की जा सकेगी।

डेढ़ से दो रुपए किलो बिकेगा गेहूं
 2015 रुपए क्विंटल के मौजूदा दाम का यह गेहूं निजी कंपनिया डेढ़ से दो रुपए किलो की कीमत पर खरीदेंगी। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना होगा।

 

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