MP High Court: ट्रक संचालकों-ड्राइवरों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर, सरकार को हड़ताल खत्‍म करवाने के निर्देश

MP High Court | Truck Driver Strike Today: एमपी में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में हड़ताल को असंवैधानिक बताया है। साथ ही हड़ताल को तत्काल खत्म करने की मांग की है।

MP High Court | Truck Driver Strike: उज्जवल प्रदेश, जबलपुर. मप्र हाई कोर्ट में ड्राइवरों की हड़ताल के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने सरकार को आदेश दिया कि हड़ताल खत्‍म करने के लिए आज ही कार्रवाई करें। हड़ताल को असंवैधानिक बताया गया है। सरकार की ओर से कहा गया कि आज ही इस मामले में ठोस निर्णय लिया जाएगा, आवश्‍यक वस्‍तुओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित की जाएगी। यह भी कहा गया कि हड़ताली एसोसिएशन पर कार्रवाई की जाए। मप्र हाईकोर्ट में हड़ताल को लेकर दो याच‍िकाओं पर सुनवाई हुई। (MP High Court)

दायर याचिका में सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को तलब को किया है। बता दें नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने याचिका में हड़ताल को असंवैधानिक बताया है। साथ ही याचिका में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हड़ताल को तत्काल खत्म करने की मांग की है।

बता दें कि हिट-रन-एंड कानून के विरोध में ट्रक-बस सहित अन्य ड्राइवरों की हड़ताल दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रही। मंगलवार को स्कूल वैन भी नहीं चली। नतीजतन स्कूलों में अघोषित अवकाश रहा। इधर हड़ताल की वजह से दूध-सब्जी सहित अन्य जरूरी व्यव्थाएं प्रभावित हुई हैं।

पेट्रोल-डीजल आवश्यक वस्तु अधिनियम अंतर्गत – MP High Court

मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ के निर्देश पर महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि पेट्रोल-डीजल आवश्यक वस्तु अधिनियम अंतर्गत आते हैं। अतः आमजन को हो रही दिक्कत को सरकार गम्भीरता से ले रही है। शीघ्र ही उपलब्धता सुनिश्चित कराने ठोस कदम उठाए जाएंगे। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता पंकज दुबे व रितिका गुप्ता ने पक्ष रखा। नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से डा. पीजी नाजपांडे मौजूद रहे।

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केंद्र सरकार ने अपराध को लेकर नए कानून बनाए

नए कानून के तहत अगर कोई ट्रक या डंपर चालक किसी को कुचलकर भागता है तो उसे 10 साल की जेल होगी। 7 लाख रुपये जुर्माना भी देना होगा। पहले इस मामले में कुछ ही दिनों में आरोपित ड्राइवर को जमानत मिल जाती थी और वो पुलिस थाने से ही बाहर आ जाता था। इस कानून के तहत भी दो साल की सजा का प्रवि‍धान था।

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