पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव ने लगाया SDM और तहसीलदारों की ग्रेडिंग प्रक्रिया में ब्रेक

भोपाल
राजधानी में पदस्थ एसडीएम और तहसीलदारों के कामों और जिम्मेदारियों को लेकर शुरू की गई ग्रेडिंग परफार्मेंस की प्रक्रिया अब पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के कारण फिर से अटक गई है।

 इस प्रक्रिया से अफसरों की कार्यप्रणाली सहित कई जानकारियां सामने आती थीं जैसे किस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया है या नहीं। उन्होंने कैसे काम किया है। इससे जनता के कामों को भी प्राथमिकता मिलती है। ग्रेडिंग परफार्मेंस से अफसरों में भी काम के प्रति स्पर्धा होने से फाइलों की पेडेंसी खत्म होती है। लेकिन अब चुनावी प्रक्रिया के कारण आगामी कुछ महीनों के लिए इस पर फिर रोक लग गई है।

इन पैरामीटर्स के आधार पर होती थी ग्रेडिंग
अफसरों की रिपोर्ट को तैयार करने में मुख्य रूप से रेवेन्यू रिकवरी, गेट अचीवमेंट, आॅफिस हाईजीन, राजस्व प्रकरणों का निराकरण, एक वर्ष से अधिक लंबित प्रकरण, नवाचार व अन्य मानक है।

जनता को सबसे ज्यादा फायदा
दरअसल, एसडीएम और तहसीलदारों की ग्रेडिंग परफार्मेंस की प्रक्रिया के कारण सबसे ज्यादा फायदा जनता को होता है। अधिकारियों के ग्रेडिंग सिस्टम से यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न श्रेणियों के आधार पर एसडीएम और तहसीलदारों ने कैसा काम किया। इसके आधार पर ही अंक मिलते थे। आॅफिस की फाइल पेडेंसी, कार्यालय की स्वच्छता, आवेदकों के आवेदन और उनकी गति के आधार पर अधिकारियों को ग्रेडिंग की जाती है। अधिकारियों को ए, बी, सी और डी ग्रेड दिया जाता है। कई अधिकारियों की माइनस मार्किंग भी जाती थी। ऐसे में अफसर अच्छी गे्रडिंग के लिए जनता के काम जल्द ही निपटाते हैं।

डेढ़ साल से बंद हैं यह प्रक्रिया
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद जिले में एसडीएम और तहसीलदारों की मासिक ग्रेडिंग पर ब्रेक लग गया है। दूसरी लहर के बाद से इनकी ग्रेडिंग जारी नहीं हुई। इसके माध्यम से पता चलता था कि किस अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कैसे किया। जिला प्रशासन अफसरों की परफार्मेंस के आधार पर उनकी रिपोर्ट जारी करता था। पिछले साल हुई ग्रेडिंग के बाद कई अधिकारियों को इधर से उधर भी किया गया था।

परफार्मेंस में अतिक्रमण हटाने के नंबर जोड़ने की उठी थी मांग
विभागीय सूत्रों की मानें तो पिछली बार तत्कालीन संभागायुक्त के निर्देश पर शहर में कई जगह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। इस पर जिन अफसरों को कम अंक मिले थे, उन्होंने गे्रेडिंग में अतिक्रमण की कार्रवाई को भी जोड़ने की मांग की थी। अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने अपने क्षेत्र अतिक्रमण हटाए, लेकिन उसके अंक नहीं मिले। इस कारण वे पिछड़ गए, क्योंकि कार्रवाई के कारण वे दूसरे काम पूरे नहीं कर सके।

 

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