बिजली कंपनी के कॉल सेंटर में 10 साल में 10 गुना बढ़ी क्षमता, फिर भी कस्टमर कम्प्लेंट पेंडिंग

भोपाल
बिजली कंपनी का कॉल सेंटर एडवांस तकनीक से लैस है। पिछले 10 साल में कॉल सेंटर को अपग्रेड करने के लिए तीन बदलाव किए गए। 10 साल पहले कॉल सेंटर की क्षमता 30 सीटर थी। अब यह बढ़कर 300 सीटर हो गई है। कॉल सेंटर में अलग-अलग जगहों से आने वाले 300 कॉल एक साथ अटैंड किए जा सकते हैं। इस सबके बावजूद आम उपभोक्ता परेशान हैं। ज्यादा बारिश होने पर बिजली गुल की समस्या तो आम बात है। जब उपभोक्ता इसके लिए कॉल सेंटर 1912 पर कॉल करते हैं तो नंबर बिजी रहता है या फिर कॉल ही नहीं लगता।

हालांकि बिजली कंपनी का दावा है कि 1 घंटे 5 मिनट में शिकायतों का निपटारा कर दिया जाता है। आम दिनों में कॉल सेंटर में रोजाना औसतन बिजली गुल से जुड़ी 250 से 350 तक शिकायतें पहुंचती हैं।बारिश के दौरान यह संख्या बढ़कर 1200 से 1500 तक पहुंच जाती है। बिजली से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में देरी की सबसे खास वजह स्टाफ के पास वाहनों और संसाधनों का कम होना है।

शिकायतों के निपटारे में देरी की यह है वजह
शहर में बिजली कंपनी के 26 जोन दफ्तर हैं। एक जोन दफ्तर के दायरे में औसतन 10 हजार उपभोक्ता हैं। इन 10 हजार लोगों की शिकायतों के लिए मैदानी अमले के पास सिर्फ एक वाहन उपलब्ध है। यदि एक ही इलाके से चार या पांच शिकायतें पहुंचती हैं तो अमले को एक से दूसरी जगह जाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लग जाता है।

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