खजराना गणेश मंदिर में अब बांस की टोकरी में मिलेंगी प्रसाद सामग्री

इंदौर
 स्वच्छता के क्षेत्र में कई उदाहरण स्थापित कर चुके इंदौर शहर के प्रतिष्ठित खजराना गणेश मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगने के बाद इस काम में तेजी आई है। मंदिर परिसर को एक अगस्त तक हर तरह के प्लास्टिक से मुक्त करने की तैयारी है। अब तक भक्तों को माला व प्रसाद प्लास्टिक की टोकरी में दिया जाता था। इसकी जगह बांस से बनी टोकरी का उपयोग किया जाएगा। अगरबत्ती भी प्लास्टिक की पैकिंग में मिलती थी।

भक्त इन्हें जलाने के बाद पैकिंग कचरे में फेंक देते थे। इस पर रोकथाम के लिए अगरबत्ती भी खुली हुई दी जाएगी। विशेष बात यह है कि यह अगरबत्ती भी भगवान को अर्पित होने वाले फूलों से बनाई जा रही है। प्रसाद के लड्डू भी गत्ते के पैकेट में दिए जाएंगे। इसमें भी प्लास्टिक पर रोक लगाने की तैयारी है।

इन प्रयासों से मंदिर परिसर में प्रतिदिन आने वाले 60 से 70 किलो प्लास्टिक के कचरे को रोका जा सकेगा। परिसर में प्रसाद व अन्य वस्तुओं की 59 दुकानें हैं। प्रबंधन ने सभी दुकानदारों से उक्त उपाय करने के साथ ही मूर्तियों की पैकेजिंग में इस्तेमाल प्लास्टिक को हटाने के लिए कहा है। सजावट में किसी भी तरह के प्लास्टिक या थर्माकोल का उपयोग नहीं होगा। कपड़े के झंडे और बैनर लगाए जाएंगे। झंडे की डंडी भी बांस की होगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में परिसर में 600 किलो फूलों से प्रतिदिन 12 से 15 किलो अगरबत्ती व धूप बनाई जाती है। अन्नाक्षेत्र में बचने वाले 40 किलो जूठन से खाद बनाई जाती है।

 

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