प्रमुख सचिव पहुंचे Kuno National Park, नहीं मिली जिप्सी, सामान्य भ्रमण के बाद लौटे

Kuno National Park : उज्जवल प्रदेश, भोपाल. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क श्योपुर में दक्षिण अफ्रीका से लाए चीते छोड़े थे। कूनो अभ्यारण की सैर के लिए श्योपुर पहुंचने वाले पर्यटकों को वन क्षेत्र में भ्रमण के लिए जिप्सी नहीं मिल पा रही हैं।

Kuno National Park : उज्जवल प्रदेश, भोपाल. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूनो नेशनल पार्क श्योपुर में दक्षिण अफ्रीका से लाए चीते छोड़े थे। कूनो अभ्यारण की सैर के लिए श्योपुर पहुंचने वाले पर्यटकों को वन क्षेत्र में भ्रमण के लिए जिप्सी नहीं मिल पा रही हैं। इसकी वजह इस क्षेत्र का पर्यटन की दृष्टि से विकसित नहीं होना है।

प्रदेश के वन विभाग के प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल भी इस कमी के शिकार बने और श्योपुर का जिला प्रशासन अपनी तमाम कोशिश के बाद भी पूरे जिले में जिप्सी नहीं तलाश पाया। लिहाजा सामान्य भ्रमण कर प्रमुख सचिव और उनके साथ गए अफसरों को लौटना पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितम्बर को श्योपुर जिले में आने वाले कूनो अभ्यारण्य में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते छोड़े गए थे। इसके बाद एक माह तक यहां पर्यटकों को भ्रमण की छूट नहीं थी लेकिन अब चीतों के धीरे-धीरे यहां के माहौल में ढलने की स्थिति को देखते हुए इसकी छूट दिए जाने की तैयारी है।

यहां के प्रशासनिक अधिकारी भी चाहते हैं कि विजयपुर, कराहल, वीरपुर जैसे क्षेत्रों में कूनो अभ्यारण्य की विजिट करने वाले पर्यटकों को सुविधा मिले और आदिवासियों को रोजगार मिले ताकि उनके जीवन स्तर सुधर सके लेकिन फिलहाल सवा माह से अधिक समय बीतने पर भी कोई बदलाव की स्थिति नहीं बन सकी है।

रातभर वाहन तलाशने के बाद भी नहीं मिला

वन विभाग के प्रमुख सचिव बर्णवाल यहां लाए गए चीतों के बारे में अपडेट स्थिति लेने के लिए पहुंचे थे और उनके साथ कुछ अन्य अधिकारी भी थे। विजिट के माध्यम से यहां पर्यटन की गतिविधियों को लेकर सरकार को प्लान तैयार करके भी वन अफसरों को देना है।

अधिकारियों के मुताबिक इस पिछड़े इलाके में मुंहमांगा पेमेंट करने के लिए अधिकारी तैयार थे लेकिन वन क्षेत्र में ले जाने के लिए रात भर की तलाश के बाद भी गुरुवार को जिप्सी नहीं मिल सकी।

माना जा रहा है कि अब प्रमुख सचिव इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर को बढ़ावा देने के लिए आदिवासियों को सब्सिडी देकर इसके लिए आगे लाने का सुझाव दे सकते हैं क्योंकि सरकार भी आदिवासियों को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सभी संभव प्रयास कर रही है।

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