केंद्र के पास अटका नक्सलियों पर अंकुश लगाने प्रस्ताव, 4 बटालियन की मांग पर नहीं लिया संज्ञान

भोपाल
प्रदेश में नक्सलियों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए)को भेजे गए बल बढ़ाने का प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल सकी है। यह प्रस्ताव तीन महीने से ज्यादा से एमएचए के पास लंबित पड़ा हुआ है। इस प्रस्ताव के इतने लंबे अरसे से पेंडिंग होने के चलते अब यह माना जा रहा है कि केंद्र इतना बल प्रदेश को नहीं देगा।

सूत्रों की मानी जाए तो जैसे ही केंद्र ने प्रदेश में नक्सली जिलों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन की थी, वैसे ही प्रदेश सरकार ने यहां पर नक्सलियों पर अंकुश लगाने के लिए 6 बटालियनों केंद्र से मांगने का विचार किया था। इस संबंध में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी बालाघाट दौरे के दौरान कहा था कि प्रदेश सरकार केंद्र से  6 बटालियनों की मांग करेगा। इसके बाद इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया गया। प्रस्ताव में पहले चरण में चार बटालियन का प्रस्ताव भेजा गया। लगभग तीन महीने पहले भेजे गए इस प्रस्ताव पर पुलिस मुख्यालय को उम्मीद थी कि केंद्र से यह बल उसे मिल जाएगा, लेकिन इतना लंबा वक्त बीत जाने के बाद अब यह आस टूट गई है। पुलिस मुख्यालय को अब लगने लगा है कि केंद्र सरकार चार बटालियन नहीं देगी।

बालाघाट-मंडला में उफढऋ के दो हजार जवान तैनात
अभी बालाघाट और मंडला जिले में केंद्र सरकार की केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ)की दो बटालियनों के लगभग दो हजार जवान तैनात हैं। दो जिलों के लिए यह बल मिला था, हालांकि इसमें से कुछ बल अब डिंडौरी जिले में भी तैनात किया गया है। वहीं प्रदेश पुलिस के हॉक फोर्स के भी करीब साढ़ सात सौ जवान यहां पर तैनात है। एसएएफ की 36 वीं वाहिनी के सभी जवानों के अलावा अन्य बटालियनों के जवान भी नक्सली क्षेत्रों में तैनात हैं। चार और बटालियन केंद्र से मिलने के बाद उम्मीद थी कि यहां के घने जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बल को तैनात कर नक्सलियों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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