17 साल पहले बनी एमपी नगर सड़क आज भी है बेहतर, पूरे शहर में बने टिकाऊ सड़कें

भोपाल

सड़कों के नाम पर हर साल बारिश के बाद गड्ढे भरने के लिए करोड़ों रुपए खर्च होते हैं और कुछ दिन बार वही स्थिति बन जाती है। क्योंकि इस काम में बड़ा करप्शन होता है। पब्लिक को परेशानी होती है सो अलग। एमपी नगर में 17 साल पहले सड़कें बनीं थी जो अब तक टिकीं हैं। सवाल यह कि पीडब्ल्यूडी और नगर निगम ऐसी सड़कें क्यों नहीं बनाता।

17 साल पहले बनी एमपी नगर सड़क आज भी बेहतर  
सन् 2004-05 में बनी एमपी नगर सड़क को बने हुए 17 साल हो चुके हैं, लेकिन आज भी सड़क बेहतर है। सड़क पर करीब 5 करोड़ की लागत से सीमेंट कांक्रीट किया गया था। इसके बनने के बाद दोबार कभी न मरम्मत की जरूरत पड़ी न गड्ढे हुए। केबिल और पाइप बिछाने के लिए सिर्फ जहां से सड़क खोदी गई। वहीं हिस्सा भर खराब हुआ है।

10 साल में सरकारी एजेंसियों ने खर्च किए 2 हजार करोड
सरकारी एजेंसियों के इंजीनियर हर साल सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर 200 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। यानी 10 साल में 2 हजार करोड़ रुपए नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, बीडीए और बंद हो चुके सीपीए के अफसर खर्च कर चुके हैं। इतनी राशि में सीसी रोड बनी होती तो वह लंबे समय तक चलती। दोबार उनके निर्माण और मरम्मत पर राशि भी खर्च नहीं करनी पड़ती।

डामर रोड नहीं सक्सेसफुल
सरकारी एजेंसियों के इंजीयिर सरकार को जानबूझकर हर साल करोड़ों रुपयों का चूना लगा रह हैं। सड़कों पर किया जाना वाला डामर सक्सेसफुल नहीं है। डामर हर साल बारिश में उखड़ जाता है। इसके बजाए सीसी रोड बनाई जानी चाहिए। सीसी रोड के बनने के बाद उसका न मेंटेनेंस करना पड़ता है न वह बारिश में उखड़ती है। इसका जीता जागता उदाहरण है एमपी नगर सड़क।

सीसी रोड की उठ रही डिमांड
शहर की जनता डामर रोड में होने वाले गड्ढे से परेशान हो चुकी है। शहरवासी चाहते हैं कि बार-बार डामर पर खर्च की जाने वाली राशि से एक बार सीसी रोड का निर्माण कराया जाता तो वह सालों साल चलती। 10 साल में खर्च की गई राशि से बनी सड़कें कभी खराब नहीं होती। इससे सरकार के कम से कम 1000 करोड़ रुपए बचते।

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