अफसरों की वजह से अटकी दो साल से SC स्कॉलरशिप

भोपाल

एक ओर सरकार अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के परिवारों की जिन्दगी में बदलाव लाने और विभिन्न योजनाओं के जरिये उनके जीवन स्तर में सुधार के प्रयास कर रही है। इसके लिए पिछले माह दोनों ही वर्गों के बच्चों को रोजगार देने आधा दर्जन नई योजनाओं को कैबिनेट ने मंजूरी दी है वहीं दूसरी ओर अफसरशाही की गलती के चलते इन वर्गों के बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ दो साल से नहीं मिल पा रहा है। अफसरों की गलती के चलते  पोस्ट मैट्रिक और प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र एक लाखों बच्चों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिलों में व्याप्त अव्यवस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2022-23 में पहली से आठवीं क्लास तक के 91.84 लाख बच्चों का प्रोफाइल अपडेशन करने के लिए निर्देश शासन स्तर से जारी किए गए थे। इसके विपरीत 35 लाख बच्चों को ही छात्रवृत्ति स्वीकृत की जा सकी है। इसके लिए स्कूल शिक्षा विभाग और ट्रायबल डिपार्टमेंट के तमाम पत्रों, निर्देशों के बाद भी भोपाल, छतरपुर, बालाघाट, मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, अलीराजपुर, शाजापुर, सीधी, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, बुरहानपुर, डिंडोरी, भिंड, बड़वानी और रतलाम की प्रोग्रेस 35 प्रतिशत से भी कम है। इन हालातों में सबसे पुअर परफार्मेंस वाले पांच डीईओ को शोकाज नोटिस भी जारी किए गए हैं।

इन जिलों ने अपडेट नहीं किए बैंक खाते
यह जानकारी भी सामने आई है कि रीवा, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, बुरहानपुर, मुरैना, नर्मदापुरम, देवास, रायसेन, सिंगरौली, दमोह, इंदौर, खरगोन, दतिया, शाजापुर, डिंडोरी, हरदा, विदिशा, टीकमगढ़, भोपाल, बैतूल, सीधी, अशोकनगर, भिंड, खंडवा, बड़वानी, अलीराजपुर जिलों में बच्चों के बैंक खातों को 45 प्रतिशत भी अपडेट नहीं किया जा सका। इस कारण दो साल पुरानी छात्रवृत्ति का भुगतान पेंडिंग है।

यह है व्यवस्था
समेकित छात्र वृत्ति योजना के लिए वर्ष 2021-22 में अनुसूचित जाति पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की 40 प्रतिशत राशि का भुगतान राज्य शासन और 60 प्रतिशत का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। दस दिन पहले हुई बैठक में यह बात सामने आई है कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्र के हिस्से की राशि इसलिए नहीं आ सकी क्योंकि एमपी के जिम्मेदार अफसरों ने बैंक खातों के साथ आईएफएससी कोड सही नहीं दर्ज किया। इसके लिए केंद्र सरकार ने एमपी के अफसरों से नाराजगी जताते हुए पांच दिन में सही डेटा भेजने के लिए कहा था लेकिन अभी तक इस काम को पूरा नहीं किया जा सका है। अब स्कूल शिक्षा विभाग ने सही खाता नम्बर और आईएफएससी कोड भेजने के लिए कहा है। साथ ही ताकीद किया है कि विद्यार्थी को गलत या त्रुटिपूर्ण छात्रवृत्ति स्वीकृत किए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

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