एफएसएल में जांच की पैंडेंसी 11 हजार पार, 200 केस की जांच करवाने का गृह विभाग में प्रस्ताव

भोपाल
मध्य प्रदेश न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में जांच की पैंडेंसी 11 हजार हो चुकी है। इसका आंकड़ा कम करने के लिए दूसरे राज्य की प्रायवेट लैब से 200 प्रकरणों के मौजूद साक्ष्यों की जांच करवाने का प्रस्ताव गृह विभाग के पास भेजा गया है।

प्रस्ताव मंजूर होने के बाद इन प्रकरणों की जांच प्रदेश की जगह पर दूसरे राज्य की लैब से करवाई जाएगी। डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना गत दिनों क्षेत्रीय एफएसएल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने एफएसएल में उपलब्ध संसाधनों और प्रकरणों की भी समीक्षा की। इस दौरान डीजीपी यहां की पेंडेंसी की डिटेल्स भी बताई गई। सूत्रों की मानी जाए तो यहां पर करीब 11 हजार के लगभग प्रकरण लंबित चल रहे हैं। इनकी संख्या कम होने की जगह पर लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसके चलते करीब एक महीने पहले एफएसएल ने 200 प्रकरणों की जांच के लिए बजट की मांग गृह विभाग से की है। ये प्रकरण प्रायवेट लैब से जांच करवाए जाने हैं। गौरतलब है कि प्रदेश पुलिस की लैब में इतने प्रकरण आते हैं कि उसकी क्षमता से अधिक भार हो जाता है। ऐसे में प्रायवेट या केंद्रीय लैब की मदद ली जाती है। इसलिए इस बार फिर 200 प्रकरणों की जांच के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।

डीजीपी ने दिए निर्देश, डीएनए की एक और लैब स्थापित हो भोपाल में
समीक्षा करने के बाद अब डीजीपी ने निर्देश दिए हैं कि भोपाल में डीएनए की एक और लैब स्थापित की जाए। इसके लिए उपकरण खरीदने का भी प्रस्ताव बनाया जाए। डीजीपी के इस निर्देश के बाद सीआईडी अब एक और लैब को लेकर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। अफसरों को उम्मीद है कि कुछ महीनों में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाएगी। वहीं ग्वालियर में भी डीएनए परीक्षण दो महीने के भीतर शुरू करने के निर्देश डीजीपी ने दिए हैं। जबलपुर की लैब को भी कोई एक्टिव करने के निर्देश दिए गए हैं।

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