प्रदेश में 79 कोर्स की एक किताब तक नहीं, 4.90 लाख स्टूडेंट्स बिना किताब दे रहे एग्जाम

भोपाल
1301 यूजी कॉलेजों में चार लाख 90 हजार स्टूडेंट्स प्रवेश लेकर बिना किताबों को पढ़े प्रथम वर्ष की परीक्षाएं दे रहे हैं। जबकि उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर में सिलेबस जारी कर दिया था। विद्यार्थी लाइब्रेरी की पुरानी किताबों में अपने सिलेबस मिलाकर नोट्स बनाकर परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री  ने देश में नई शिक्षा नीति को लागू किया है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने मप्र को सबसे पहले नई शिक्षा नीति को लागू करने वाला राज्य बताया था। पूरा साल बीत गया है, लेकिन सरकार विद्यार्थियों को एक किताब तक मुहैया नहीं करा सका है। पूरे राज्य में प्रथम वर्ष के 79 कोर्स की एक भी किताब मौजूद नहीं हैं। मतलब प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने चार लाख 90 हजार विद्यार्थियों ने पूरा साल बिना किताबें पढ़े ही निकाल दिया है। अब उनकी परीक्षाएं शुरू हो गई हैं। जबकि उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर में सिलेबस तैयार कर जारी कर दिया था।

पूरा कोर्स नहीं मिलने से नहीं मिलेंगे 100 फीसदी अंक
सिलेबस के मुताबिक पूरे प्रदेश में एक भी किताब मौजूद नहीं हैं। विद्यार्थी पुरानी किताबों से अपनी तैयार कर रहे हैं। इसमें उन्हें महज 70 फीसदी कोर्स ही मिल सकेगा, क्योंकि नई शिक्षा नीति के तहत तैयार किये गये सिलेबस में तीस फीसदी नया कोर्स जोड़ा गया है। इसलिए विद्यार्थी अधिकतम 70 फीसदी तक अंक हासिल कर सकते हैं। उन्हें 100 फीसदी अंक हासिल हीं नहीं हो सकेंगे।

20 फीसदी तक नहीं हुई आॅनलाइन पढाई
विभाग ने सिलेबस के तहत आनलाइन वीडियो और ओडियो तैयार कर वेबसाइट पर लिंक अपलोड कर दिए हैं। समूचे राज्य में प्रवेशित चार लाख 90 हजार विद्यार्थियों में से बीस फीसदी विद्यार्थी तक आडियो और वीडियो को नहीं देख सके हैं। इसकी वजह विद्यार्थियों का कम्प्यूटर और मोबाइल फें्रडली नहीं होना बताया गया है।

हिंदी ग्रंथ अकादमी भी जीरो
एससी-एसटी विद्यार्थियों को नि:शुल्क किताबें देने के लिए किताबों को प्रशासन मुहैया करता है। अकादमी ने एक भी किताब को तैयार नहीं किया है। इसके चलते एससी-एसटी वर्ग के किसी भी विद्यार्थी ने कोई अध्ययन नहीं किया है। वे बिना पढेÞ ही आठ विवि की प्रथम वर्ष की परीक्षाओं में शामिल होंगे।

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