संघर्ष से सफलता की ओर जनजातीय महिलाएँ

भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन, जनजातीय कार्य विभाग के वन्या प्रकाशन द्वारा 8 जनजाति बहुल क्षेत्रों में संचालित वन्या सामुदायिक रेडियो केन्द्रों से विशेष कार्यक्रम "संघर्ष से सफलता की ओर जनजातीय महिलाएँ" प्रसारित किया जायेगा।

प्रबंध संचालक वन्या श्रीमती मीनाक्षी सिंह ने बताया कि पहली बार वन्या रेडियो केन्द्रों पर विभिन्न जनजातियों की वे महिलाएँ अपने खट्टे-मीठे अनुभव साझा कर रही हैं, जिन्होंने समुदाय की महिलाओं के बीच अपने नवाचारी कार्यों की उपलब्धियों से प्रेरक मुकाम हासिल किया है।

गौरतलब है कि वन्या द्वारा चिचौली (बैतूल), बिजोरी (छिन्दवाड़ा), चाड़ा (डिण्डोरी) खालवा (खण्डवा). मेघनगर (झाबुआ), चन्द्रशेखर आजाद नगर (अलीराजपुर), नालछा (धार) और सेसईपुरा (श्योपुर) आदि गोंड, कोरकू, बैगा, भारिया, भील, भिलाला, सहरिया आदि जनजाति बहुल क्षेत्रों में संचालित सामुदायिक रेडियो केन्द्र से हिन्दी और संबंधित क्षेत्रों की जनजातीय बोलियों में पारंपरिक, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक कार्यक्रम प्रसारित किये जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेषतौर पर तैयार कार्यक्रम "संघर्ष से सफलता की ओर जनजातीय महिलाएँ" शीर्षक कार्यक्रम में बागप्रिंट में विशेष कौशल से अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका 'वॉग (Vogue)' के कव्हर पेज पर जगह पाने वाली धार जिले की श्रीमती सीता वसुनिया, शौचालय न होने के कारण शादी के बाद ससुराल जाने से मना करके सुपर स्टार अक्षय कुमार की चर्चित फिल्म 'टॉयलेट' की प्रेरणा के रूप में सुर्ख़ियों में आयी बैतूल जिले के चिचोली की श्रीमती अनिता नर्रे, पारंपरिक बैगा मौखिक साहित्य और संस्कृति के प्रोत्साहन, संरक्षण और दस्तावेजीकरण में प्रमुख भूमिका निभाने वाली डिण्डोरी जिले के चपवार गाँव की श्रीमती भागवती रठूड़िया, शीतलपानी (चाड़ा) डिण्डोरी की ख़ुद अपने ट्रेक्टर से खेतों की जुताई कर आत्म-निर्भर बनने वाली बैगा महिला अघनी बाई अपने संघर्ष और सफलता की कहानी बतायेंगी।

इसी प्रकार भील समुदाय के अभावपूर्ण जीवन से बाहर निकलकर मध्यप्रदेश शासन के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित स्कूलों से शिक्षा प्राप्त कर लोक सेवा आयोग से डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित होने वाली सुश्री हेमलता सोलंकी और सहायक प्रबंधक ई-गवर्नेस के पद पर कार्यरत सुश्री पिंकी भँवर, मजदूरी के साथ हिन्दी साहित्य में एम.ए. कर वनरक्षक जैसी चुनौती पूर्ण नौकरी करते हुए अविवाहित रहकर भाई-बहनों को पढ़ाने वाली खंडवा जिले के करवानीमाल गाँव की मंजू पाटिल, निःस्वार्थ सेवाभाव से जरूरतमंद महिलाओं के पास तत्काल पहुँचकर सकुशल प्रसव कराने वाली मेघनगर (झाबुआ) की लोकप्रिय दाई नामवाली डामोर, सहरिया महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्म-निर्भर बनाने के लिये कालीमाला महिला स्व-सहायता समूह संचालित करने वाली मोरावन (श्योपुर) की श्रीमती सियाबाई, अपनी लगनशीलता से माध्यमिक शिक्षिका बनने वाली बिजोरी (छिन्दवाड़ा) की भारिया महिला नीलू भारती और जमलाफलिया (अलीराजपुर) मे वर्ष 2016 से ग्राहक सुविधा केन्द्र संचालित करने वाली कु. घेसू बामनिया अपने संघर्ष और सफलता की कहानियाँ बयाँ करेंगी।

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