स्वयंसेवी संस्थाएँ गरीबी दूर करने के प्रयासों में उत्प्रेरक बनें : राज्यपाल पटेल

भोपाल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि विकास की विविध भूमिकाओं में गरीबों को जोड़ कर उनकी गरीबी दूर करने के प्रयासों में स्वयंसेवी संस्थाएँ उत्प्रेरक की भूमिका में आगे आएँ। उन्होंने कहा कि वित्तीय संसाधनों को एकत्र कर लोगों को आत्म-निर्भर बनाने के प्रयासों में उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। उन्होंने राज्य की तीव्र आर्थिक प्रगति के लिए प्रदेश सरकार को बधाई दी।

राज्यपाल पटेल कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा विकास में भागीदारी के लिए आयोजित स्वयंसेवी सम्मेलन शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में प्रदेश के 52 जिलों से आए स्वयंसेवी संस्थाओं, डोनर एजेंसियों, विकास कार्यों में भागीदार संस्थाओं के प्रतिनिधि और विद्वान मौजूद थे।

राज्यपाल पटेल ने कहा कि स्वयंसेवी संस्थाएँ स्वयं का उदाहरण प्रस्तुत कर समाज में बदलाव के प्रयास करें। सिकल सेल नियंत्रण में उनके सहयोग की अपेक्षा करते हुए बताया कि प्रदेश के करीब पौने दो करोड़ जनजातीय आबादी का एक बड़ा भाग आनुवांशिक रोग सिकल सेल से पीड़ित है। उन्होंने सबसे पहले राजभवन में सिकल सेल जाँच शिविर लगवाया था। इसमें 55 में 12 सिकल सेल वाहक मिलें थे, जो स्थिति की गंभीरता को बताता है। उन्होंने बताया कि सिकल सेल एनीमिया रोग नियंत्रण की दिशा में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सार्थक प्रयास किए गए हैं। रोग की जांच का कार्य अलीराजपुर और झाबुआ जिले में व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने रोग की प्रकृति, स्वरूप और नियंत्रण की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2006 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब सिकल सेल नियंत्रण का व्यापक स्तर पर कार्य किया गया था। राज्यपाल ने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्व में सिकल सेल रोग अधिकांशतः जनजातीय समाज में पाया गया है। अभी तक रोग का पूरी तरह से इलाज नहीं खोजा जा सका है। लेकिन रोग की सही समय पर विशेषकर गर्भावस्था में जांच, आवश्यक उपचार और उचित जीवन शैली से रोग के दुष्प्रभावों को कम कर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त झाबुआ जिले के जनजातीय ग्राम का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने के स्वयंसेवी प्रयासों की महत्ता बताते हुए कहा कि समाज में बड़ा वर्ग सेवा कार्यों में सहयोग के लिए तत्पर है। जरूरत निस्वार्थ और सेवा भाव से कार्य के परिणाम देने की है।

सहकारिता, लोक सेवा प्रबंधन मंत्री अरविंद भदौरिया ने कहा कि सरकार एग्पा के माध्यम से अपने कार्यक्रमों और योजनाओं की जमीनी सच्चाइयों का विश्लेषण करते हुए कार्य कर रही है। इसी आधार पर कुपोषण की समस्या के समाधान में माताओं के पौष्टिक भोजन में ताजी सब्जियाँ उपलब्ध कराने, उनके खातों में राशि जमा कर, उन्हें आर्थिक सहयोग की व्यवस्था की है। देश में सबसे पहले मध्यप्रदेश में लोक सेवा गारंटी कानून जैसे अनेक कार्य किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी देह और देव के प्रति सचेत है। इस चेतना में देश की चिंता को जोड़ने के प्रयासों में स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज के भावनात्मक राष्ट्रवाद के अनुसार कार्य करने पर हमारा देश दुनिया में जगतगुरु के रुप में प्रतिष्ठित होगा।

स्वयंसेवी संस्था शिवगंगा झाबुआ के पद्ममहेश शर्मा ने कहा कि सुशासन के संबंध में सरकार और समाज में निरंतर चिंतन होता रहता है। सुशासन के लिए समाज की प्रकृति को समझना जरूरी है। भारतीय समाज के जीवन मूल्य सरकार आश्रित समाज के नहीं हैं। समाज की सोच में सरकार से मांगने की प्रवृत्ति नहीं है। मांगने से स्वाभिमान प्रभावित होता है। जो आवेदन करते हैं, वह लाभार्थी होते हैं, परमार्थी नहीं। यही कारण है कि सरकार के आर्थिक सहयोग के बिना बड़े-बड़े सामाजिक कार्य सफलतापूर्वक हुए और हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन मूल्यों की शिक्षा परिवार के बड़े बुजुर्ग, साधु संत आदि अनेक लोग देते है। सरकार को समाज के नैतिक जीवन-मूल्यों को और समाज क्या चाहता है, उसे समझ कर उसके साथ सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।

बेन केपिटल प्रायवेट इक्विटी इंडिया के मुख्य प्रबंध संचालक अमित आर. चंद्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश की आबादी का काफी बड़ा भाग कृषि व्यवसाय पर आधारित है। कृषि उत्पादकता और आमदनी में वृद्धि के नवाचारों को प्रोत्साहित करने के क्षेत्र में स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना चाहिए। राज्य में प्राकृतिक कृषि के विकास के बहुत अवसर है। प्रदेश के किसानों द्वारा प्राकृतिक कृषि को अंगीकृत करने पर अर्थ-व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुराग बेहार ने कहा कि फाउंडेशन सार्वजनिक शिक्षा तंत्र को बेहतर बनाने के लिए सरकार के साथ कार्य करता है। समाज सेवी शिक्षा को विश्वविद्यालयीन स्वरूप देने के लिए बैंगलोर में पहला विश्वविद्यालय स्थापित किया गया है और अब दूसरा भोपाल में स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा सरकारी वित्तीय सहयोग के बिना स्वयंसेवी संस्थाओं को समाज में योगदान के लिए सरकार के साथ काम करना चाहिए। संस्था का वित्तीय और विषय-विशेषज्ञता का मज़बूत आधार होना अनिवार्य है। अच्छी सोच और नीयत होने पर ही बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं के परस्पर संबंधों पर कहा कि सरकार के मीडिल स्तर को स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रति दृष्टिकोण में सम्मान भाव को बढ़ाते हुए व्यवस्थाओं की निरंतरता को बनाए रखना चाहिए। स्वयंसेवी संस्थाओं को सरकारी ढाँचे में शामिल करने के बजाए, उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में जोड़ना चाहिए।

एग्पा के उपाध्यक्ष सचिन चतुर्वेदी ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि बताई। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और समाज सेवा के क्षेत्र में प्रदेश में कार्यरत संस्थाओं को आमंत्रित किया है। मंशा राज्य की प्रगति के प्रवाह में उन्हें जोड़ कर सिकल सेल, कुपोषण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को रोकने आदि की चुनौतियों का सामना करने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रगति से जन-मानस को अवगत कराने, जिला स्तरीय विकासात्मक शोध अध्ययन आदि से संबंधित गतिविधियाँ दो दिवसीय सम्मेलन में होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश तेजी से विकास कर रहा है। आर्थिक वृद्धि दर 19.7 प्रतिशत और जी.डी.पी. 11.69 लाख करोड़ रुपए है। राज्य का पूँजीगत निवेश 40 हजार करोड़ रुपए है। राजकोषीय घाटा भी कम हुआ है।

स्वागत उद्बोधन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती जी.वी. रश्मि ने दिया। संस्थान की संचालक सुटीना यादव ने आभार माना।

 

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