मुंडका अग्निकांड: गैर इरादतन हत्या के आरोप में दोनों फैक्ट्री मालिक गिरफ्तार, लाशों की पहचान मुश्किल

नई दिल्ली

बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके की चार मंजिला इमारत में शुक्रवार शाम भीषण आग लग गई। इस घटना में अबतक 27 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए। फिलहाल तलाशी और बचाव कार्य जारी है। इससे माना जा रहा है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक वरुण गोयल और सतीश गोयल को हिरासत में लेने के बाद गैर इरादतन हत्या के आरोप में गिराफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि हादसे में कंपनी मालिक के पिता की भी मौत हो गई है। वहीं आज सुबह करीब 10 बजे एफएसएल की टीम जांच करने पहुंचेगी।

एफएसएल की टीम करेगी जांच

मुंडका के मेट्रो पिलर संख्या 544 के पास पांच सौ वर्ग गज में बनी इमारत में लगी भीषण आग की जांच करने आज सुबह करीब 10 बजे दिल्ली फोरेंसिक टीम के अधिकारी पहुचेंगे। टीम शव के अवशेषों को कब्जे में लेकर जांच करेगी। इसके अलावा घटनास्थल की तफ्तीश की जाएगी।

चार मंजिला इमारत में लगी आग

बता दें कि मुंडका की जिस चार मंजिला इमारत में सीसीटीवी कैमरे और राउटर का निर्माण एवं पैकेजिंग होती है उसमें स्थानीय महिलाएं काम करती हैं। पहली मंजिल पर कंपनी का ऑफिस बना हुआ है। कंपनी के मालिक वरुण गोयल और अशोक कुमार हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार शाम करीब 4.35 बजे इमारत की पहली मंजिल की सीढ़ी से धुआं निकलना शुरू हुआ और आग तेजी से पूरी इमारत में फैल गई। इसकी वजह से लोगों में भगदड़ मच गई। घटना के समय इमारत में करीब 76-77 लोग मौजूद थे। इस आग की वजह से कुछ देर के लिए मेट्रो का परिचालन भी बाधित हो गया था।

फैक्ट्री के दोनों मालिकों की पहचान वरुण गोयल और सतीश गोयल के रूप में हुई है, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। बता दें कि आग इतनी भीषण थी कि 30 से अधिक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और 100 से ज्यादा फायर फाइटर्स उसे बुझाने में लगे रहे। शनिवार को भी ऑपरेशन जारी है, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि अब वहां कोई लाश नहीं है। घटना के वक्त इमारत में 150 लोग काम रहे थे। दरअसल, इस बिल्डिंग का इस्तेमाल बिना परमिशन कमर्शियल रूप से हो रहा था। यहां सीसीटीवी कैमरा पैकेजिंग यूनिट का काम होता था। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि आग से बचने कई लोग ऊपर से कूद गए।

हादसे के बाद पीड़ितों के परिवार रातभर अपनों के जिंदा होने की उम्मीद में यहां-वहां भटकते रहे। हालांकि अभी भी उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है। अपने परिवार के सदस्यों की तलाश में शुक्रवार रात संजय गांधी अस्पताल पहुंचे अजीत तिवारी ने मीडिया को बताया कि उसकी बहन मोनिका (21) घटना के बाद से लापता है। उसने पिछले महीने ही सीसीटीवी कैमरा पैकेजिंग यूनिट में जॉब शुरू किया था। गुरुवार को उसे पहली सैलरी मिली थी। अजीत के मुताबिक, शाम 5 बजे उन्हें आग के बारे में पता चला। हालांकि तब तक यह नहीं मालूम था कि आग बहन के ऑफिस वाली बिल्डिंग में लगी है। शाम 7 बजे तक जब वो घर नहीं लौटी, तो उसकी तलाश शुरू की।

एक महिला की बड़ी बेटी यहीं सीसीटीवी कैमरा पैकेजिंग यूनिट में भी काम करती थी। उसने बताया कि पूजा पिछले तीन महीनों से सीसीटीवी कैमरा पैकेजिंग यूनिट में काम कर रही है। वे मुबारकपुर में रहते हैं। रात 9 बजे घटना के बारे में पता चला। पूजा के बाईं आंख के नीचे एक कट का निशान है। कई अस्पतालों में वो उसे  ढूंढ़ चुक हैं, लेकिन अभी तक नहीं मिली है। वो चार सदस्यों के परिवार की एकमात्र कमाने वाली है। उसकी दो छोटी बहनें एक स्कूल में पढ़ती हैं।

इसी बिल्डिंग में काम करने वाले अंकित ने Zee न्यूज को बताया कि जब आग लगी वो सेकंड फ्लोर पर थे। वहां मोटिवेशनल क्लास चल रही थी। धुंआ ऊपर की तरफ तेजी से आया और लोग सीढ़ियों से नीचे नहीं उतर सके। सीढ़ियों में इतना धुंआ भरा था कि लोगों का दम घुट रहा था। फिर वो छज्जे की तरफ का शीशा तोड़कर सेकंड फ्लोर से रस्सी के सहारे नीचे आए।

मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास इस बिल्डिंग में लगी आग को बुझाने NDRF की टीम को अभियान चलाना पड़ा। हादसे में 27 लोगों की मौत हुई और 12 लोग घायल बताए जाते हैं। मुंडका फायर बिल्डिंग एनओसी पर डिवीजनल ऑफिसर, फायर विभाग, दिल्ली सतपाल भारद्वाज ने कहा कि इस इलाके में उचित भवन नहीं थे, इसलिए इस इमारत का NOC नहीं हुआ। इन्हें फायर की तरफ से NOC नहीं मिला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आग लगने की घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।

जान बचाने के लिए उपर की तरफ भागे लोग, मिली मौत

आग लगने पर जान बचाने के लिए जो लोग ऊपर की तरफ भागे उन्हें मौत मिली। ऊपर की तरफ धुआं तेजी से फैल गया और निकलने का रास्ता नहीं मिला। मुंडका की इस इमारत की दूसरी मंजिल पर खौफनाक मंजर का सामना दमकल कर्मियों को करना पड़ा। पहली मंजिल पर जीने के पास आग लगनी शुरू हुई थी। इमारत में एक ही जीना था। इसके चलते लोग ऊपर की तरफ भागे। पहली मंजिल से धुआं भरना शुरू हुआ और लोग जान बचाने के लिए दूसरी मंजिल की तरफ भागे। लेकिन धुएं की चपेट में आकर दम घुट गया और जान गंवा बैठे। माना जा रहा है कि पहली मंजिल पर बिजली की तारों में आग लगने से धुआं फैला। घटना के वक्त पहली मंजिल पर कर्मचारियों की भीड़ थी।

 

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