योगी सरकार के नए मंत्रियों की आसान नहीं राह, बड़ी चुनौती का करना है सामना

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल में सभी मंत्रियों ने कामकाज शुरू कर दिया है। कमोबेश हर किसी ने पूजा पाठ कर श्रीगणेश किया है। मंत्रिमंडल में उत्साह है और कई ऊर्जावान चेहरे हैं। इसके बावजूद नए मंत्रियों को अपने कामकाज के प्रदर्शन की कसौटी पर खरा उतरना बड़ी चुनौती होगा। वह भी तब जबकि खुद मुख्यमंत्री सभी को टारगेट दे चुके हैं और उन्हें खुद ही प्रजेंटेशन करने के निर्देश हैं।

मंत्री अधिकारियों संग बैठक कर विभाग की पेचीदगियां मालूम करने में जुटे हैं। साथ ही उन्हें भाजपा का लोक कल्याण संकल्प पत्र भी दिया गया है। उन्हें अपने प्रस्तुतिकरण में संकल्प पत्र की योजनाओं के बारे में फैक्ट और कार्य पूरा करने का रोडमैप देना है। कुछ मंत्रियों की तो सांसें ऊपर नीचे हो रही हैं। अधिकांश तो मोबाइल चला लेते हैं लेकिन उन्हें कंप्यूटर-लैपटाप चलाना, डाउनलोड, शेयर, टैगिंग आदि की बारीक जानकारियां नहीं है। उस पर मुख्यमंत्री ने उन्हें आईआईएम में प्रशिक्षण दिलाने की भी बात कही है।
ऐसे में मंत्री अभी से निजी विशेषज्ञों से मंत्रणा में जुट गए हैं कि कैसे प्रस्तुतिकरण बनाया जाए। कुछ अपने जनसंपर्क में लगी टीम और निजी सचिव से जानकारी ले रहे हैं तो कुछ कंप्यूटर एक्सपर्ट बुला रहे हैं। एक बड़े अधिकारी ने कहा-‘मंत्रियों को अपने टारगेट खुद ही तय करने हैं और उन्हें पूरा भी करना है। ऐसे में काम पर खरा उतरना उनके लिए बहुत ही चुनौती पूर्ण होगा। देखना दिलचस्प होगा कि वक्त के साथ मंत्री कैसे खुद को बदल पाते हैं।’

काम खराब होने के कारण कटा पत्ता
योगी राज 2.0 में 22 मंत्रियों के पत्ते कट चुके हैं। इनमें पिछली सरकार के कई महत्वपूर्ण चेहरे थे, जिनको काम उच्चश्रेणी का न होने के कारण मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। हालांकि इन मंत्रियों ने अच्छा काम भी किया था। मसलन, डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा को जातीय उपयोगिता और विभागीय शिथिलताओं के कारण जगह नहीं मिली। हालांकि उन्होंने नकल माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाइयां की थीं। इसी तरह आशुतोष टंडन स्मार्ट सिटी के काम में धीमी गति दिक्कत का सबब बनी। श्रीकांत शर्मा की रवानगी का सबब जन्माष्टमी पर बिजली गुल होना, बिजली कर्मियों के पीएफ में करोड़ों के घोटाला और सीबीआई जांच बनी। हालांकि उन्होंने प्रदेश को 24 घंटे बिजली दिलाने का बेहतरीन काम किया था। वहीं डा. महेंद्र सिंह नमामि गंगे विभाग में घपले के आरोप। जय प्रकाश निषाद को उनके कार्यकाल कक्ष में धोखाधड़ी होने के कारण पत्ता साफ हुआ।

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