यूपी की स्कूली लड़कियां तंबाकू खाने-धुंआ उड़ाने में लड़कों से आगे, सर्वे में रिपोर्ट में खुलासा

लखनऊ
 यूपी की लड़कियां गुटखा-तंबाकू खाने और धुएं के छल्ले उड़ाने में लड़कों से भी आगे हैं। यह अलग बात है कि ज्यादातर लड़के सिगरेट खरीदकर पीते हैं मगर लड़कियां इसे मांग कर या दूसरे माध्यमों से हासिल करती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज की सर्वे रिपोर्ट में ऐसी ही चौंकाने वाली चीजें शामिल हैं। रिपोर्ट के लिहाज से हर सौ में 23 लड़के-लड़कियां किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। वहीं यदि इसे लड़के और लड़कियों के लिहाज से देखें तो 22 फीसदी लड़के और 24 फीसदी लड़कियां तंबाकू उत्पादों का सेवन करते हैं। स्कूली छात्र-छात्राओं पर किए गए इस ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे-4 की रिपोर्ट में 1.9 फीसदी लड़के और 2.7 प्रतिशत लड़कियां सिगरेट पीते हैं जबकि बीड़ी पीने के मामले में लड़कियों की दर लड़कों से दोगुनी है। 1.3 फीसदी लड़के और 2.6 फीसदी लड़कियां बीड़ी पीने की आदी हैं।

लड़कियां खरीदती हैं पूरा बीड़ी का बंडल
सर्वे रिपोर्ट में तंबाकू सेवन और धूम्रपान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि करीब 36 फीसदी लड़के एक सिगरेट खरीदकर पीते हैं जबकि लड़कियों में बीड़ी का पूरा बंडल खरीदने की प्रवृत्ति पाई गई है। इसमें से 18 फीसदी ही ऐसी हैं, जो एकल बीड़ी या सिगरेट खरीदती हैं। भविष्य की संभावनाओं की बात करें तो इसमें भी लड़कियां आगे हैं। तंबाकू या धूम्रपान न करने वाले 6.6 फीसदी लड़के निकट भविष्य में इसका सेवन कर सकते हैं जबकि लड़कियों के मामले में यह आंकड़ा लगभग 10 फीसदी है।
 
लड़कियों में तंबाकू छोड़ने की दर भी अधिक
खास बात यह है कि जिस तरह लड़कियां गुटखा-तंबाकू खाने और धूम्रपान में आगे हैं, उसकी तरह इन चीजों को छोड़ने की प्रवृत्ति में भी वे लड़कों से आगे हैं। सर्वे अवधि के 12 माह में 2.8 फीसदी लड़कों ने और 3.7 प्रतिशत लड़कियों ने धूम्रपान से तौबा कर ली जबकि करीब 5 फीसदी लड़कियां ऐसा करने का प्रयास कर रही हैं। वहीं तंबाकू सेवन के मामले में 23.8 फीसदी लड़कों और 29.7 फीसदी लड़कियों ने इसे छोड़ने का प्रयास किया है।

सर्वे में इन्हें किया गया शामिल
पूरे देश में जीवाईटीएस-4 में 97 हजार से अधिक स्कूली बच्चों को इस सर्वे में शामिल किया गया जबकि यूपी में सरकारी और निजी स्कूलों के 3501 बच्चों को शामिल किया गया।

 

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