राजस्थान चुनाव: 52 सीटों पर कांग्रेस लगा चुकी है हार की हैट्रिक, जीतने के लिए ये है प्लान

जयपुर
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए है। कांग्रेस पिछली बार जिन विधानसभा सीटों पर हार की हैट्रिक लगा चुकी है, उन्हें जीतने के लिए रणनीति बना रही है। कांग्रेस का प्रदेश की ऐसी 52 सीटों पर फोकस है। इन सीटों पर कांग्रेस को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। इन सीटों को जीतने के लिए खास रणनीति के तहत के दिग्गज नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों को को जिम्मा दिया है। इन सीटों को जीतने के लिए कांग्रेस के सबसे अनुशासित संगठन कांग्रेस सेवादल को चुनाव प्रबंधन का टास्क दिया गया है। इस बार इन सीटों पर भाजपा को चौथी बार कमल खिलाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

इन सीटों पर लगी कांग्रेस की हैट्रिक
राजस्थान में 52 विधानसभा सीटें ऐसी है जहां कांग्रेस का लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। जिन 52 सीटों पर राजस्थान कांग्रेस को लगातार तीन बार से हार मिल रही है उनमें श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, भादरा, बीकानेर पूर्व, रतनगढ़, उदयपुरवाटी, खंडेला, शाहपुरा, फुलेरा, विद्याधर नगर, मालवीय नगर, सांगानेर, बस्सी, किशनगढ़ बास, बहरोड, थानागाजी, अलवर शहर, नगर, नदबई, धौलपुर, महवा, गंगापुर, मालपुरा, अजमेर नॉर्थ, अजमेर साउथ, ब्यावर, नागौर, खींवसर, मेड़ता, जैतारण, सोजत, पाली, मारवाड़ जंक्शन, बाली, भोपालगढ़, सूरसागर, सिवाना, भीनमाल, सिरोही, रेवदर, उदयपुर, घाटोल, कुशलगढ़, राजसमंद, आसींद, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा साउथ, लाडपुरा, रामगंज मंडी, झालरापाटन और खानपुर है। इन सीटों पर चौथी बार भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाएंगे। जनता से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने के अपील करेंगे। प्रदेश कांग्रेस की रणनीति है कि इन सीटों पर प्रत्याशियों को लेकर फीडबैक लिया जाएगा।  

विधानसभा चुनाव 2023  के अंत तक
राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 के अंत में है। हमेशा की तरह इस बार भी कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर होगी। भाजपा लगातार गहलोत सरकार पर हमला बोल रही है। प्रदेश की कानून व्यवस्था से लेकर बिजली संकट के मुद्दे पर गहलोत सरकार पर हमलावर है। भाजपा को सत्ता में वापसी करने की उम्मीद है। कांग्रेस सीएम गहलोत की बजट घोषणाओं के सहारे सत्ता में आने की उम्मीद लगाए हुए है। सीएम गहलोत लगातार भाजपा पर हमला बोल रहे हैं। सीएम गहलोत ने पुरानी पेंशन योजना और मुफ्त में ईलाज का मास्टर स्ट्रोक खेलकर भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। कांग्रेस को गहलोत-पायलट गुट की खींचतान का नुकसान चुनाव में उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। भाजपा में सीएम फेस को लेकर पूर्व सीएम वसुंधरा विरोधी धड़ा सक्रिय हो गया है। वसुंधरा समर्थक लगातार राजे को सीएम फेस घोषित करने की मांग कर रहे हैं।

 

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